NEET परीक्षा में CBT लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, सुधारों पर अन्य याचिकाओं के साथ होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि नीट (NEET-UG) परीक्षा को पारंपरिक पेन-पेपर प्रणाली से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने का मुद्दा गंभीर विचार का विषय है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस व्यापक प्रश्न पर अन्य लंबित याचिकाओं के साथ एक साथ सुनवाई की जाएगी।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में संरचनात्मक सुधारों के लिए एक हाई लेवल टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। इस समिति की अध्यक्षता नंदन नीलेकणी करेंगे।
समिति में पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व खुफिया ब्यूरो निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा भी शामिल हैं।
सरकार की ओर से बताया गया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया जारी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि चूंकि संबंधित मामलों की सुनवाई पहले से ही अगले सोमवार निर्धारित है, इसलिए इस याचिका को भी उसी दिन सुना जाएगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट तत्काल राहत देने से इनकार कर चुका है और 21 जून को प्रस्तावित पुनर्परीक्षा को CBT मोड में कराने का आदेश देने से मना कर दिया था। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा था कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को सीबीटी में बदलने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि यदि भविष्य में CBT प्रणाली लागू की जाती है तो डेटा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी, क्योंकि डिजिटल माध्यम में भी डेटा लीक होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
याचिका में मांग की गई कि NEET परीक्षा को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाया जाए। साथ ही प्रश्नपत्रों की डिजिटल सुरक्षा, बायोमेट्रिक सत्यापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और साइबर सुरक्षा के मजबूत प्रावधान लागू किए जाएं।
याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के स्थान पर एक स्वतंत्र वैधानिक परीक्षा प्राधिकरण बनाया जाए, जो राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन और निगरानी के लिए अधिक जवाबदेह और तकनीकी रूप से सक्षम हो।
यह याचिका 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के कथित पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने के बाद दायर की गई। इसमें परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय लागू करने की मांग की गई।