सीरिया युद्ध साज़िश का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 6 साल जेल में रहने वाले आरोपी को दी 10 दिन की अंतरिम ज़मानत
सुप्रीम कोर्ट ने सीरिया सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की आपराधिक साज़िश में शामिल होने के आरोपी व्यक्ति को 10 दिन की अंतरिम ज़मानत दी। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि वह 5 साल और 11 महीने से जेल में है और उसके भाई की सर्जरी होनी है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने उसे अंतरिम राहत इस आधार पर दी कि याचिकाकर्ता अपनी माँ और सुनने में अक्षम बच्चे के साथ रहना चाहता था, जबकि उनकी देखभाल करने वाले उसके भाई की सर्जरी होनी है।
कोर्ट ने कहा,
"हकीकत यह है कि बच्चा काफी समय से बीमारी से जूझ रहा है। याचिकाकर्ता अपने बच्चे और माँ के साथ रहना चाहता है, क्योंकि भाई की सर्जरी होनी है। साथ ही, वह 5 साल और 11 महीने से जेल में है। हम उसे 11 सितंबर से 10 दिन की अंतरिम ज़मानत देते हैं।"
कर्नाटक हाईकोर्ट ने फरवरी में याचिकाकर्ता को ज़मानत देने से इनकार किया था। इसलिए उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता का भाई किडनी की बीमारी से पीड़ित है और वही याचिकाकर्ता की माँ और बेटे की देखभाल करने वाला एकमात्र व्यक्ति है। उन्होंने कहा कि भाई की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होगा।
दवे ने एक महीने की अंतरिम ज़मानत की मांग करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पांच साल से ज़्यादा समय से अंडर-ट्रायल (मुकदमा चलने तक) के तौर पर हिरासत में है और उसकी रेगुलर ज़मानत की अर्ज़ी अक्टूबर में आने की संभावना है।
उन्होंने कहा,
"मैं अपनी माँ और बच्चे की देखभाल के लिए एक महीने का समय मांग रहा हूँ। मामला अक्टूबर में रेगुलर ज़मानत के लिए आ रहा है। कोर्ट मुझे अक्टूबर तक अंतरिम ज़मानत पर रिहा कर सकता है। मैं वापस आकर सरेंडर कर दूँगा। मैं छह साल में एक बार भी हिरासत से बाहर नहीं निकला हूँ। सिर्फ़ इमरजेंसी की वजह से मैं अभी मांग कर रहा हूँ।"
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अर्ज़ी का विरोध किया। उसने कहा कि याचिकाकर्ता के बच्चे की विकलांगता का हवाला कुछ समय से दिया जा रहा है और माँ को किसी तत्काल मेडिकल मदद की ज़रूरत नहीं है। NIA ने यह भी कहा कि भाई माँ और बच्चे के साथ नहीं रहता है।
जस्टिस सुंदेश ने कहा कि कोर्ट को ऐसी कोई इमरजेंसी नहीं दिखी जिसके लिए एक महीने की रिहाई दी जाए, लेकिन चूंकि याचिकाकर्ता लगभग 6 साल से कस्टडी में है, इसलिए उसे 10 दिन की ज़मानत दी जा सकती है।
उन्होंने कहा,
"बात बस इतनी है कि हमें कोई इमरजेंसी नहीं दिख रही है। लेकिन वह हमारे सामने बहुत गुहार लगा रहा है और वह साढ़े 5 साल से जेल में है। हम उसे एक महीने की मोहलत नहीं देंगे। हम 10 दिन देंगे।"
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर से 10 दिनों के लिए अंतरिम ज़मानत दी।
Case Title – Irfan Nasir @ Irfi v. National Investigation Agency