कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में शिकायतकर्ता की ओर से जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि उसके सामने सभी मामलों को समान रूप से देखा जाता है।

शिकायतकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो रही है और मामले को दूसरे मामलों के साथ जोड़कर रखा गया।

मामला राहुल गांधी की उस विशेष अनुमति याचिका से जुड़ा है, जिसमें भारतीय सेना और 2020 के गलवान संघर्ष के संदर्भ में चीन के हमले को लेकर कथित टिप्पणी से पैदा हुई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी गई।

अगस्त 2025 में जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई थी। मामले की पिछली सुनवाई 23 अप्रैल को हुई।

बुधवार को राहुल गांधी का मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष दो अन्य मामलों के साथ सूचीबद्ध था।

सुनवाई के दौरान गौरव भाटिया ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए लेने और दूसरे मामलों से अलग करने का अनुरोध किया।

भाटिया ने कहा कि मामले में लगातार तारीखें पड़ रही हैं और राहुल गांधी निचली अदालत द्वारा तय तारीखों पर पेश नहीं हुए।

उन्होंने कहा,

“राहुल गांधी VIP नहीं हैं। मामले को अलग कर स्वतंत्र रूप से सुना जाना चाहिए।”

शिकायतकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि करीब पांच महीने पहले मामला सूचीबद्ध हुआ लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी।

उनका आरोप है कि न्यायिक निर्देश के बावजूद रजिस्ट्री मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति संस्था के लिए भी उचित नहीं है।

इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,

“सभी मामलों को हमारे सामने बराबर माना जाता है। उचित आवेदन दाखिल कीजिए।”

कोर्ट ने शिकायतकर्ता के पक्ष को जल्द सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और इसके लिए आवेदन दाखिल करने को कहा।

राहुल गांधी की याचिका को द वायर से जुड़े दो अन्य आपराधिक मानहानि मामलों के साथ जोड़ा गया है। उन मामलों में पेश वकील ने पीठ को बताया कि अब सीमित सवाल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 की व्याख्या से जुड़ा है।

सवाल यह है कि क्या किसी आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेने से पहले उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।

वकील ने यह भी कहा कि द वायर से जुड़े मामलों का राहुल गांधी से जुड़े 2024 के मामले से कोई संबंध नहीं है, जिसके साथ इन्हें सूचीबद्ध किया गया।

इस आधार पर भी मामलों को अलग-अलग सुनने की मांग रखी गई।

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