सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसके तहत रोहतक सेशन डिवीजन के न्यायिक अधिकारियों को ऐसे मामले में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करने से रोक दिया गया था, जिसमें बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट निवेश घोटाले का आरोप है। इस मामले में निवेशकों के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का आरोप है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने 27 अक्टूबर को यह आदेश दिया। यह आदेश हाईकोर्ट के 30 सितंबर के फैसले को चुनौती देने वाली 'स्पेशल लीव पिटिशन' (SLP) पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया।

कोर्ट ने नोटिस जारी किया, जिसका जवाब चार सप्ताह के भीतर देना होगा। इस बीच हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई गई।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

"नोटिस जारी करें, जिसका जवाब चार सप्ताह में आना चाहिए। इसके अलावा, 'दस्ती सर्विस' (सीधे तामील) की भी अनुमति दी जाती है। इस बीच पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (चंडीगढ़) द्वारा CRM M-42815/2026 मामले में 30.09.2026 को पारित आदेश पर रोक रहेगी।"

हाईकोर्ट ने यह आदेश 'गुप्ता प्रॉपर्टी डेवलपर्स' के पार्टनर सुभाष गुप्ता द्वारा दायर एक अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Petition) पर सुनवाई के दौरान दिया। यह मामला IPC की धाराओं 420, 120-B और 506 (जो अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 61 और 351(2) के समान हैं) के तहत दर्ज FIR से जुड़ा है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जांच प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि मुख्य आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। इन आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के नाम पर कई निवेशकों से करोड़ों रुपये लिए, लेकिन न तो उन्हें प्रॉपर्टी का पजेशन (कब्जा) दिया और न ही उनका निवेश किया गया पैसा वापस किया।

हाईकोर्ट ने यह भी गौर किया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद, जांच सही तरीके से आगे नहीं बढ़ी है। इसमें बताया गया कि रोहतक के पुलिस अधीक्षक गौरव राजपुरोहित के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की जांच कर रहा है। साथ ही DHL इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक कुलदीप कुमार तहलान और गुप्ता प्रॉपर्टी डेवलपर्स के कर्मचारी गुरविंदर जीत सिंह को गिरफ्तार किया गया।

अदालत ने गौर किया कि कुलदीप कुमार तहलान को जमानत मिल गई, जबकि रोहतक की अदालतों ने गुरविंदर जीत सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने यह भी पाया कि DHL इन्फ्राटेक के तीन निदेशकों और कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता सिद्धांत को उसी पीठासीन अधिकारी ने अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी, जिसने हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की जमानत याचिका खारिज की थी। हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि ये चारों आरोपी कथित तौर पर अन्य घोटालों में भी शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि रियल एस्टेट डेवलपर्स अक्सर घर खरीदारों से समय पर पजेशन देने का वादा करके करोड़ों रुपये वसूलते हैं, जबकि उन्हें पता होता है कि प्रोजेक्ट को वादे के मुताबिक पूरा नहीं किया जा सकता। इसके बाद वे निवेश की गई रकम को कहीं और खपा देते हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह का व्यवहार धोखाधड़ी के लेन-देन का एक लगातार चलने वाला पैटर्न है, जिसे अक्सर केवल संविदात्मक विवाद (Contractual Dispute) के रूप में पेश किया जाता है।

हाईकोर्ट ने कहा,

"इस तरह की सुनियोजित धोखाधड़ी को भी अक्सर संविदात्मक संबंधों से जुड़े अलग-अलग विवादों के रूप में दिखाया जाता है। लेकिन जब अदालतें इन मामलों की जांच करती हैं तो पता चलता है कि ये विवाद असल में एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद मासूम खरीदारों को उनकी जीवन भर की कमाई से ठगना है।"

अदालत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने कई बार उन जांचों पर नाराजगी जताई है, जो कथित तौर पर बड़े पैमाने पर आर्थिक धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स को फायदा पहुंचाने के लिए की जाती हैं।

अदालत ने कहा कि पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को जांच की समीक्षा करने और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद, जांच अधिकारी ने कथित तौर पर आरोपियों की मदद करने की कोशिश की और जांच को सही तरीके से आगे नहीं बढ़ाया।

यह देखते हुए कि रोहतक में पुलिस अधिकारी रियल एस्टेट प्रमोटरों और डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं, हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह इस कथित घोटाले की जांच के लिए एक वरिष्ठ IPS अधिकारी को नियुक्त करे और अगली सुनवाई से पहले एक स्टेटस रिपोर्ट पेश करे।

सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर को हाईकोर्ट के 30 सितंबर के आदेश पर रोक लगाई, जब तक कि आगे की कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती।

Case Title : Sidhant Ohlan v. State of Haryana

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