पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल में 'कैजुअल वैकेंसी' पर होंगे चुनाव, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की चुनौती
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 अक्टूबर) को वकील द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने से मना किया, जिसमें पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल के फैसले को चुनौती दी गई थी। इस फैसले के तहत निर्वाचित सदस्य के हाईकोर्ट जज के रूप में पदोन्नत होने से खाली हुई सीट (कैजुअल वैकेंसी) को भरने के लिए चुनाव कराया जाना है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की बेंच ने वकील चेतन वर्मा द्वारा दायर इस याचिका पर सुनवाई की।
वर्मा ने नई दिल्ली स्थित इलेक्शन ट्रिब्यूनल नंबर 2 के 9 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ट्रिब्यूनल ने उनकी उस अर्जी को खारिज किया, जिसमें उन्होंने बार काउंसिल का सदस्य घोषित किए जाने की मांग की थी। यह सीट तब खाली हुई, जब निर्वाचित सदस्य मिंदरजीत यादव को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश की गई।
यह अपील 'एडवोकेट्स एक्ट, 1961' की धारा 38 के तहत दायर की गई।
वर्मा ने मार्च 2026 में हुए पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल के चुनाव में हिस्सा लिया था। उनका दावा था कि असफल उम्मीदवारों में उन्हें सबसे ज्यादा वोट मिले थे और वोटों की गिनती के दौरान वे बाहर (एलिमिनेट) नहीं हुए।
कॉलेजियम द्वारा यादव को हाईकोर्ट में जज बनाने की सिफारिश के बाद वर्मा ने दावा किया कि खाली हुई सीट पर उनका हक बनता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब यह सीट खाली हुई, तब चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से संपन्न नहीं हुई।
हालांकि, इलेक्शन ट्रिब्यूनल ने उनका दावा खारिज किया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह एक 'कैजुअल वैकेंसी' है, जो लागू नियमों के नियम 45 और 46 के दायरे में आती है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि नियमों में ऐसी खाली सीट को भरने के लिए, सबसे ज्यादा वोट पाने वाले असफल उम्मीदवार को अपने आप सदस्य बना लेने का कोई प्रावधान नहीं है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों के बीच खाली हुई सीट (कैजुअल वैकेंसी) को तय प्रक्रिया के अनुसार ही भरा जाना चाहिए, जिसमें पात्र वकीलों के बीच चुनाव कराने का प्रावधान है।
इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने अपना वह अंतरिम आदेश भी वापस ले लिया, जिसके तहत बार काउंसिल को सीट भरने से रोका गया। अब बार काउंसिल कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल की ओर से पेश वकील जसबीर सिंह मलिक ने बताया कि बार काउंसिल के 23 निर्वाचित सदस्यों की घोषणा करने वाली अधिसूचना 5 मई, 2026 को जारी की गई। इसके जारी होते ही सभी 23 निर्वाचित सीटें भर गईं।
वकील ने तर्क दिया कि इसके बाद पैदा होने वाली किसी भी रिक्ति (Vacancy) को कानूनी तौर पर 'आकस्मिक रिक्ति' (Casual Vacancy) माना जाना चाहिए। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल चुनाव नियम, 1968 के नियम 45 के अनुसार, इस आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए चुनाव कराया गया और उस सीट को भर दिया गया।
चुनौती में कोई दम न पाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार किया। इस पर वर्मा के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका 'वापस ली गई' मानकर खारिज की।
Case Title : Chetan Verma v. Bar Council of India