सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत से जुड़ी कार्यवाही पर सुनवाई की। कोर्ट ने उन्हें 16 नवंबर तक अपने परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ दिवाली मनाने के लिए अपने गृहनगर जाने की अनुमति दी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला 3 अक्टूबर 2021 की उस घटना से जुड़ा है, जिसमें उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में प्रदर्शन कर रहे किसानों के ऊपर कथित तौर पर आशीष मिश्रा के काफिले की गाड़ियां चढ़ गई थीं। इस घटना में चार किसानों और एक पत्रकार सहित पांच लोगों की मौत हो गई। किसान उन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्हें बाद में रद्द कर दिया गया।

इससे पहले कोर्ट ने उन्हें इस शर्त पर जमानत दी थी कि वे मुकदमे की सुनवाई में पेश होने के अलावा लखीमपुर खीरी में प्रवेश नहीं करेंगे। बाद में इस शर्त में ढील दी गई और उन्हें सप्ताहांत (वीकेंड) पर अपने गृहनगर जाने की अनुमति दी गई। हालांकि जमानत पक्की कर दी गई, लेकिन मुकदमे की प्रगति पर नजर रखने के लिए कोर्ट ने मामले को लंबित रखा।

सुनवाई के दौरान, पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने ट्रायल जज के तबादले पर संतोष जताया। पीड़ितों ने पहले इस जज पर अविश्वास जताया था।

आशीष मिश्रा की ओर से पेश सीनियर वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी, न कि जज के खिलाफ किसी संदेह या प्रतिकूल निष्कर्ष के कारण।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि कोर्ट किसी पर कोई आरोप नहीं लगा रहा है।

चीफ जस्टिस ने कहा,

"हम किसी के खिलाफ कुछ नहीं कह रहे हैं। हाईकोर्ट ने जो भी सुधारात्मक कदम उठाए हैं, वे ठीक हैं।"

इससे पहले कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वह ट्रायल जज के संबंध में हाईकोर्ट की सतर्कता (विजिलेंस) रिपोर्ट पर उचित कार्रवाई करे।

भूषण ने कहा कि अभी तो केवल जज का तबादला हुआ है, लेकिन आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।

वहीं, चीफ जस्टिस ने इस बात पर जोर दिया कि मुकदमे की कार्यवाही तेजी से और संतुलित तरीके से आगे बढ़नी चाहिए। उत्तर प्रदेश राज्य की स्टैंडिंग काउंसिल, अधिवक्ता रुचिरा गोयल ने बेंच को बताया कि इस मामले में विशेष लोक अभियोजक (SPP) नियुक्त किया गया। कुल 131 गवाहों में से 90 से पूछताछ पूरी हो चुकी है, जबकि 41 गवाहों से पूछताछ अभी बाकी है।

मुकदमे की गति को लेकर जताई गई चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया:

“मुकदमा समय पर पूरा होना चाहिए। न तो बहुत ज्यादा जल्दबाजी होनी चाहिए और न ही इसमें बहुत अधिक देरी होनी चाहिए। अभियोजन पक्ष को संतुलन बनाए रखना होगा।”

सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने अदालत से अनुरोध किया कि आशीष मिश्रा को दिवाली मनाने के लिए एक हफ्ते तक अपने परिवार के साथ लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी जाए। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी त्योहारों के मौकों पर अदालत ने उन्हें इसी तरह की छूट दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

अपने आदेश में बेंच ने दर्ज किया:

“याचिकाकर्ता को अपने परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ आने वाली दिवाली मनाने के लिए अपने गृहनगर लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी जाती है। यह अनुमति पहले लगाई गई शर्तों के अधीन होगी। उन्हें 16 तारीख को वापस लौटना होगा।”

Case Title: Ashish Mishra Alias Monu v. State of U.P. SLP(Crl) No. 7857/2022

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