
सुप्रीम कोर्ट ने महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने अहमदाबाद में साबरमती आश्रम के पुनरुद्धार/पुनर्विकास के गुजरात सरकार के फैसले को चुनौती दी थी, जिसकी अनुमानित लागत ₹1,200 करोड़ है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने गांधी द्वारा गुजरात हाईकोर्ट के सितंबर, 2022 के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका खारिज की थी, जिसमें उनकी चुनौती खारिज कर दिया गया था। खंडपीठ ने याचिका खारिज करने के लिए याचिका दायर करने में लगभग 2.5 साल की लंबी देरी का हवाला दिया।
इस परियोजना को गांधीवादी विरासत के साथ विश्वासघात बताते हुए गांधी ने अपनी याचिका में कहा,
"प्रस्तावित परियोजना सौ साल पुराने आश्रम की स्थलाकृति को 1,200 करोड़ रुपये तक बदल देगी और इसके लोकाचार को भ्रष्ट कर देगी। परियोजना में कथित तौर पर 40 से अधिक संगत इमारतों की पहचान की गई, जिन्हें संरक्षित किया जाएगा, जबकि बाकी लगभग 200 इमारतों को नष्ट कर दिया जाएगा या फिर उनका पुनर्निर्माण किया जाएगा।"
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए इस आश्वासन पर ध्यान दिया कि मौजूदा आश्रम को परेशान नहीं किया जाएगा, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रस्तावित परियोजना महात्मा गांधी के विचारों और दर्शन को बढ़ावा देगी। यह व्यापक रूप से मानव जाति के लिए फायदेमंद होगी और पुनर्निर्मित गांधी आश्रम सभी आयु समूहों के लोगों के लिए सीखने का स्थान होगा।
केस टाइटल: तुषार अरुण गांधी बनाम गुजरात राज्य | डायरी संख्या - 12965/2025