सुप्रीम कोर्ट ने AG से स्टेट बार काउंसिल की सदस्य संख्या बढ़ाने की याचिका पर विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से स्टेट बार काउंसिल (SBC) की कानूनी सीमा बढ़ाने की याचिका पर विचार करने को कहा। अभी एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 3(2)(b) के तहत इसमें अधिकतम 25 सदस्य हो सकते हैं।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने वकील की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। वकील का तर्क था कि SBC में 25 सदस्यों की कानूनी सीमा 1961 में एक्ट बनने के समय तय की गई। लेकिन समय के साथ वोटर्स की संख्या काफी बढ़ गई है। उदाहरण के लिए, उन्होंने बताया कि दिल्ली बार काउंसिल में अभी 2 लाख रजिस्टर्ड वकील हैं, इसलिए चुनी हुई बॉडी में पर्याप्त और आनुपातिक प्रतिनिधित्व ज़रूरी है।
यह रिट याचिका AoR निखिल जैन के ज़रिए रोहित पांडे ने दायर की। उन्होंने इस साल दिल्ली बार काउंसिल का चुनाव लड़ा था और 2,259 वोट पाए, लेकिन SBC के 25 सदस्यों में शामिल होने से 63.5 वोट से चूक गए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के SBC में महिला वकीलों के लिए 30% प्रतिनिधित्व आरक्षित करने के निर्देश के कारण कम रैंकिंग वाली महिला उम्मीदवार को चुना हुआ घोषित कर दिया गया, जबकि उन्हें सिर्फ़ 265 वोट मिले थे। उनकी याचिका के अनुसार, उस महिला उम्मीदवार को चुना हुआ सदस्य घोषित करना 1961 के एक्ट के खिलाफ़ है।
इसके साथ ही, सीनियर एडवोकेट विकास सिंह और अन्य सीनियर वकीलों ने तर्क दिया कि आर्टिकल 142 का इस्तेमाल ऐसा न्यायिक आदेश देने के लिए नहीं किया जा सकता, जो कानूनी व्यवस्था के खिलाफ़ हो।
संक्षिप्त दलीलों पर विचार करते हुए कोर्ट ने वैसा ही आदेश देना उचित समझा जैसा उसने 2 सितंबर को दिया।
आदेश देते हुए जस्टिस बागची ने कहा:
"हम न्यायिक सीमाओं से पूरी तरह वाकिफ हैं, इसीलिए अटॉर्नी जनरल से अनुरोध कर रहे हैं।"
कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अगर AG की राय अलग होती है तो कोर्ट उस पर विचार करेगा। 2 सितंबर को महाराष्ट्र और गोवा की बार काउंसिलों में सीटें बढ़ाने से जुड़ी एक और रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह मामला नीतिगत फ़ैसला लेने से जुड़ा है। इसलिए कोर्ट ने AG से अनुरोध किया कि वे इस रिट याचिका को एक 'रिप्रेज़ेंटेशन' (अनुरोध-पत्र) के तौर पर लें और SBCs के साथ बातचीत करके उचित फ़ैसला लें।
इसके बाद तमिलनाडु की बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए 30% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सीटें बढ़ाने से जुड़ी एक और रिट याचिका पर बेंच ने साफ़ किया कि उसका 2 सितंबर का आदेश पूरे देश में लागू होगा।
योगमाया एमजी बनाम UOI (2025) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को एक ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया, जिसमें महिला वकीलों के लिए SBCs में 30% सीटें आरक्षित करने की मंज़ूरी दी गई।
Case Title : ROHIT PANDEY Vs UNION OF INDIA