संभल हिंसा मामला: सीजेएम कोर्ट का एएसपी अनुज चौधरी और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश

Update: 2026-01-15 06:35 GMT

संभल हिंसा से जुड़े एक अहम घटनाक्रम में चंदौसी स्थित संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने एएसपी (सर्किल ऑफिसर) अनुज चौधरी, संभल कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी अनुज कुमार तोमर तथा 15–20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

यह आदेश नवंबर 2024 में हुई हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग में एक स्थानीय युवक आलम के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में पारित किया गया।

सीजेएम विभांशु सुधीर ने यह आदेश घायल युवक के पिता यामीन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNNS) की धारा 173(4) के तहत दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद पारित किया।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि 24 नवंबर 2024 को सुबह करीब 8:45 बजे यामीन का बेटा आलम मोहल्ला कोट, संभल स्थित जामा मस्जिद के पास ठेले पर 'पापे' (रस्क) और बिस्कुट बेच रहा था। उसी दौरान नामजद पुलिस अधिकारियों ने भीड़ पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी।

आरोप के अनुसार आलम जान बचाने के लिए ठेला छोड़कर भागा, लेकिन उसे पीठ में दो गोलियां और हाथ में एक गोली लगी, जिससे वह मौके पर गिर पड़ा।

बाद में उसे मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी सर्जरी हुई और शरीर से एक गोली निकाली गई।

पुलिस द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया कि आलम को गोली लगी थी लेकिन यह भी कहा गया कि उसके शरीर से बरामद .32 बोर (7.65 मिमी) की गोली वह कैलिबर नहीं है, जिसका इस्तेमाल पुलिस करती है।

इस पर कोर्ट ने मेडिकल दस्तावेजों और रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि पीड़ित को गोली लगी हालांकि गोली चलाने वाले की पहचान जांच का विषय है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि हत्या के प्रयास जैसा गंभीर अपराध होने पर पीड़ित वास्तविक अपराधी को छोड़कर किसी अन्य को झूठा फंसाने की संभावना नहीं रखता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में आधिकारिक कर्तव्य” की आड़ नहीं ली जा सकती और किसी व्यक्ति पर गोली चलाना कर्तव्य पालन नहीं माना जा सकता।

सीजेएम ने पुलिस की प्रारंभिक दलीलों को संदेहास्पद बताते हुए कहा कि वे मेडिकल साक्ष्यों से मेल नहीं खातीं, जिनमें स्पष्ट रूप से “गनशॉट वाउंड” और “दंगे के दौरान पुलिस फायरिंग” का उल्लेख है।

कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है और सच्चाई केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है।

इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने BNNS की धारा 173(4) के तहत आवेदन स्वीकार करते हुए संभल के थाना प्रभारी को FIR दर्ज करने और मामले की जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

पुलिस को सात दिनों के भीतर FIR पंजीकरण की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया गया।

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