पुणे पोर्शे मामला: नाबालिग यात्रियों के ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में तीन आरोपियों को मिली जमानत
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के पुणे पोर्शे हादसे से जुड़े ब्लड सैंपल अदला-बदली षड्यंत्र मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी। इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी।
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने आशीष सतीश मित्तल, आदित्य अविनाश सूद और अमर संतोष गायकवाड़ को ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाने वाली शर्तों के अधीन रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने यह ध्यान में रखा कि तीनों आरोपी पिछले 18 महीनों से हिरासत में हैं।
आरोप है कि इन तीनों ने साजिश के तहत कार में सवार दो नाबालिगों (कथित नाबालिग चालक के अलावा), जो कथित रूप से शराब के नशे में थे, के ब्लड सैंपल बदलकर अपने सैंपल लगा दिए, ताकि शराब सेवन को छिपाया जा सके। आरोपियों पर आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जालसाजी, साक्ष्य से छेड़छाड़ और रिश्वत से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
मामले के अनुसार, आशीष मित्तल उस बच्चे के पिता का मित्र है जो कार की पिछली सीट पर था, आदित्य सूद उसी बच्चे का पिता है, जबकि अमर गायकवाड़ पर कथित तौर पर 3 लाख रुपये लेकर नाबालिगों के ब्लड सैंपल बदलवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है।
आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि पिछली सीट पर बैठे दोनों नाबालिगों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है और हादसा किसी नाबालिग द्वारा नहीं, बल्कि चालक द्वारा वाहन चलाने के कारण हुआ। यह भी कहा गया कि कथित नशे में गाड़ी चलाने वाले नाबालिग के खिलाफ कार्यवाही किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष लंबित है और अपीलकर्ताओं को इतने लंबे समय तक जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
वहीं, मृतक महिला की मां की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने जमानत का विरोध करते हुए इसे “पूरे आपराधिक न्याय तंत्र को कमजोर करने का क्लासिक मामला” बताया। उन्होंने कहा कि यह साजिश केवल हादसे तक सीमित नहीं थी, बल्कि जांच को प्रभावित करने और शराब सेवन छिपाने के लिए संगठित प्रयास किए गए।
जमानत आदेश सुनाने के बाद जस्टिस नागरत्ना ने माता-पिता की जिम्मेदारी पर कड़ी मौखिक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि नाबालिगों को शराब पीने देना, उन्हें कार देना और लापरवाह जश्न की अनुमति देना एक गंभीर सामाजिक समस्या को दर्शाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इन पहलुओं पर विस्तृत टिप्पणी करने से बच रही हैं ताकि चल रहे ट्रायल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।