सुप्रीम कोर्ट में आयुर्वेद कोर्स में एडमिशन के लिए योग्यता प्रतिशत कम करने की मांग को लेकर याचिका दायर

Update: 2022-05-16 06:18 GMT

NEET 2021 में बैठने वाले आयुर्वेद कैंडिडेट या उम्मीदवार ने बड़ी संख्या में रिक्तियों को देखते हुए आयुर्वेद कोर्स में एडमिशन के लिए योग्यता प्रतिशत में कमी की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष याचिका का शुक्रवार को सूचीबद्ध किया गया था। इसके लिए पीठ ने उक्त याचिका उस याचिका के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था, जिसमें बीडीएस कोर्स के लिए प्रतिशत को कम नहीं करने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी गई है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जवाबी हलफनामा दायर करके याचिका पर केंद्र की प्रतिक्रिया मांगी थी:

1. एमबीबीएस कोर्सेस (बीडीएस कोर्स) के लिए दिए गए एडमिशन में कटौती के बाद कुल पात्र उम्मीदवार कितने हैं?

2. अखिल भारतीय कोटा और राज्य कोटा में रिक्त सीटों की कुल संख्या कितनी है?

3. एक तरफ सरकारी कॉलेजों में और दूसरी तरफ प्राइवेट/डीम्ड कॉलेजों में कितनी सीटें बची हैं?

याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट शिवम सिंह पेश हुए और याचिका एओआर नीरज शेखर के माध्यम से दायर की गई।

याचिकाकर्ताओं ने शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए एडमिशन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग करते हुए तर्क दिया कि आयुर्वेद कोर्स में एडमिशन एमबीबीएस/बीडीएस/आयुष कोर्सेस के लिए आयोजित किए जा रहे सामान्य NEET-2021 द्वारा किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के केंद्र सरकार से बीडीएस कोर्स के लिए प्रतिशत कम करने पर विचार करने के लिए कहने वाले 29 अप्रैल, 2022 के आदेश का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया,

"यदि बीडीएस कोर्स के लिए प्रतिशत को कम किया जा रहा है/विचार किया जा रहा है तो पर्सेंटाइल भी हो सकता है। याचिकाकर्ता को प्रवेश लेने के लिए सक्षम करने वाले आयुर्वेद कार्यक्रम के लिए कम किया गया।"

अपनी दलील को और पुख्ता करने के लिए याचिकाकर्ताओं ने हर्षित अग्रवाल और अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में पारित फैसले का हवाला दिया, जिसमें अदालत ने कहा था कि बीडीएस कोर्स के प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए न्यूनतम अंक कम करना और पर्सेंटाइल को कम करना शिक्षा के मानकों को कम करने के बराबर नहीं होगा। और शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए बीडीएस पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए प्रतिशत अंक को 10 प्रतिशत कम करने का निर्देश दिया।

केस टाइटल: अमित कुमार बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य | डब्ल्यूपी (सिविल) 351/2022

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