सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई। इसमें नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा NEET-PG 2026 के लिए आंसर की और उम्मीदवारों के जवाब जारी करने के तरीके को चुनौती दी गई। याचिका में मांग की गई कि हर उम्मीदवार को दिखाए गए असली सवाल और विकल्प बताए जाएं ताकि वे अपने स्कोर की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकें।

डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर यह याचिका NBEMS के 1 अक्टूबर 2026 के उस नोटिस को चुनौती देती है, जिसके तहत उम्मीदवार अपने व्यक्तिगत लॉगिन के ज़रिए सवाल-वार अपना मूल्यांकन देख सकते हैं।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि हालांकि नोटिस में क्वेश्चन ID, सही जवाब की न्यूमेरिकल ID, उम्मीदवारों के रिकॉर्ड किए गए जवाब और हर सवाल के लिए मिले अंक दिए गए, लेकिन इसमें असली सवाल या विकल्पों का टेक्स्ट उस क्रम में नहीं बताया गया है जिस क्रम में वे परीक्षा के दौरान दिखाए गए।

याचिका के अनुसार, जानकारी देने का यह तरीका उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से यह जांचने की अनुमति नहीं देता है कि उनके द्वारा हल किए गए सवालों के लिए सही आंसर की का इस्तेमाल किया गया है या नहीं, या उनके जवाबों को संबंधित सवालों और विकल्पों के साथ सही ढंग से मैप किया गया या नहीं।

NEET-PG 2026 परीक्षा 30 अगस्त 2026 को आयोजित की गई और नतीजे 24 सितंबर को घोषित किए गए।

याचिका में कहा गया कि उम्मीदवारों ने विशेष रूप से असली प्रश्न पत्र, आधिकारिक आंसर की और अपने रिकॉर्ड किए गए जवाबों को दिखाने की मांग की, न कि केवल न्यूमेरिकल आइडेंटिफ़ायर की। हालांकि, NBEMS ने ऐसी कई शिकायतों का जवाब स्टैंडर्ड कम्युनिकेशन के ज़रिए दिया और कहा कि घोषित नतीजे "तथ्यात्मक और सही" हैं। साथ ही उम्मीदवारों को 24 सितंबर के अपने सार्वजनिक नोटिस के पॉइंट नंबर 9 का हवाला दिया।

याचिका का तर्क है कि यह जानकारी अपर्याप्त है क्योंकि NBEMS सवालों के क्रम और विकल्पों के क्रम, दोनों के लिए उम्मीदवार-विशिष्ट शफ़लिंग मैकेनिज्म का पालन करता है।

नतीजतन, याचिका में यह तर्क दिया गया कि केवल यह बताना कि एक खास न्यूमेरिकल विकल्प को सही माना गया और उम्मीदवार ने दूसरा विकल्प चुना, उन्हें उन विकल्पों की असली सामग्री का पता लगाने या यह जांचने में सक्षम नहीं बनाता है कि सही सवाल और विकल्प के क्रम को उनके परीक्षा रिकॉर्ड के साथ सही ढंग से मैप किया गया या नहीं।

याचिका में कहा गया कि मौजूदा सिस्टम से ज़्यादा से ज़्यादा सिर्फ़ दिए गए अंकों का गणितीय मिलान ही हो पाता है। इससे मुख्य आंसर की या उम्मीदवार के लिए खास तौर पर तैयार किए गए सवाल और ऑप्शन की मैपिंग की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं हो पाती।

इसमें यह भी कहा गया कि असल सवालों और ऑप्शन को देखे बिना उम्मीदवार अस्पष्ट सवालों, एक से ज़्यादा सही जवाब वाले सवालों, ऑफिशियल आंसर की में गलतियों या सवालों, ऑप्शन और रिकॉर्ड किए गए जवाबों की मैपिंग में गड़बड़ियों की ठीक से पहचान नहीं कर सकते।

याचिका में NBEMS को निर्देश देने की मांग की गई कि वह हर उम्मीदवार को उनकी परीक्षा से जुड़ा क्वेश्चन पेपर और रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध कराए। इसमें उसी क्रम में असल सवाल हों, उम्मीदवार के लिए खास क्रम में सभी ऑप्शन हों, रिकॉर्ड किए गए जवाब हों, फ़ाइनल ऑफिशियल आंसर की के अनुसार सही जवाब हों और हर सवाल के लिए मिले अंक हों।

इसमें इन रिकॉर्ड्स की PDF, CSV या किसी अन्य उपयुक्त फ़ॉर्मेट में डाउनलोड करने योग्य और स्थायी इलेक्ट्रॉनिक कॉपी की मांग की गई। साथ ही उम्मीदवारों के लिए असल सवालों और विकल्पों को देखने के बाद खास सवालों पर आपत्ति जताने के लिए एक उचित और समय-सीमा वाली व्यवस्था की भी मांग की गई।

याचिकाकर्ता ने ऐसी आपत्तियों पर विचार करने के लिए विषय-विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की, जिसमें उम्मीदवारों को जहां लागू हो, वहां सहायक आधिकारिक मेडिकल सामग्री जमा करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने गलतियां पाए जाने पर स्कोर और रैंक में जरूरी सुधार की भी मांग की।

याचिका में भविष्य की पोस्टग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए परीक्षा के बाद जानकारी सार्वजनिक करने की पारदर्शी व्यवस्था को संस्थागत बनाने के लिए उचित दिशानिर्देश या मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की भी मांग की गई।

याचिका में 'उपेंद्र यादव बनाम नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज' मामले का हवाला दिया गया, जिसमें NEET-PG 2025 के मास्टर सेट के संदर्भ में प्रश्न ID, उत्तर कुंजी और उम्मीदवार के जवाबों को सार्वजनिक करने के तरीके को चुनौती दी गई।

याचिका में कहा गया कि परीक्षा के बाद जानकारी सार्वजनिक करने की स्पष्ट और सत्यापन योग्य व्यवस्था को लेकर लगातार परीक्षा चक्रों में चिंताएं सामने आई हैं।

याचिका में मामले की तात्कालिकता पर भी जोर दिया गया और कहा गया कि NEET-PG 2026 के लिए घोषित स्कोर और रैंक काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया का आधार बनेंगे। इसमें तर्क दिया गया है कि उम्मीदवारों को अपने स्कोर को सत्यापित करने और पहचानी गई गलतियों को सुधारने का प्रभावी अवसर देने में किसी भी देरी के परिणामस्वरूप काउंसलिंग प्रक्रिया ऐसी गलतियों को ठीक किए बिना ही आगे बढ़ सकती है।

याचिका में 1 अक्टूबर के उस नोटिस को रद्द करने की मांग की गई, जो जानकारी को केवल प्रश्न ID, सही उत्तर की संख्यात्मक ID, उम्मीदवार के जवाबों की संख्यात्मक ID और प्रश्न-वार अंकों तक सीमित करता है, जबकि संबंधित असल सवाल और उम्मीदवार-विशिष्ट विकल्प टेक्स्ट उपलब्ध नहीं कराता।

इसमें NBEMS को यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि वह व्यक्तिगत आवेदक लॉगिन के माध्यम से उम्मीदवार-वार परीक्षा रिकॉर्ड उपलब्ध कराए।

Case Title : Democratic Medical Association v. Union of India and Ors.

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