मोटर दुर्घटना मुआवजे में कृत्रिम अंग और उसके रखरखाव का खर्च शामिल करना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-04-22 09:42 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे में कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक लिम्ब) और उसके रखरखाव का खर्च भी शामिल किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे उपकरण पीड़ित की गतिशीलता, आत्मविश्वास और गरिमा बहाल करने के लिए आवश्यक हैं।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीखंडपीठ ने 2007 की एक बस दुर्घटना से जुड़े मामले में यह टिप्पणी की, जिसमें पीड़ित का दाहिना पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा था।

कोर्ट की टिप्पणियां

अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 168 के तहत “न्यायोचित मुआवजा” का मतलब है ऐसा मुआवजा जो पीड़ित की वास्तविक जरूरतों को पूरा करे और उसे दुर्घटना से पहले की स्थिति के करीब लाने का प्रयास करे।

कोर्ट ने यह भी माना कि कृत्रिम अंग एक बार का खर्च नहीं होता, बल्कि इसे समय-समय पर बदलना और उसका रखरखाव करना जरूरी होता है।

मुआवजे की गणना

अदालत ने माना कि एक कृत्रिम अंग को औसतन हर 5 वर्ष में बदलना पड़ता है। पीड़ित की उम्र (32 वर्ष) और जीवन प्रत्याशा (70 वर्ष) को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि उसे जीवनभर में 7 कृत्रिम अंगों की आवश्यकता होगी।

प्रति कृत्रिम अंग ₹3 लाख तय किए गए

रखरखाव के लिए ₹5 लाख अतिरिक्त दिए गए

इस प्रकार, केवल कृत्रिम अंग और उसके रखरखाव के लिए ₹26 लाख का मुआवजा निर्धारित किया गया।

सरकारी दरों पर टिप्पणी

अदालत ने बीमा कंपनी की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कम सरकारी दरों का हवाला दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि मुआवजा पीड़ित की उचित जरूरतों के आधार पर तय होगा, न कि केवल सबसे सस्ते विकल्प के आधार पर।

पृष्ठभूमि

मामला 2007 की एक दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें हरियाणा रोडवेज की बस ने पीड़ित की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने पहले ₹8.73 लाख का मुआवजा दिया था, जिसे राजस्थान हाईकोर्ट ने बढ़ाकर ₹13.02 लाख कर दिया।

अदालत का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे में वृद्धि करते हुए बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह हाईकोर्ट द्वारा दिए गए मुआवजे के अतिरिक्त ₹36.2 लाख चार सप्ताह के भीतर अदा करे।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजा तय करते समय पीड़ित की दीर्घकालिक जरूरतों और गरिमा को ध्यान में रखना आवश्यक है, और कृत्रिम अंग जैसे आवश्यक उपकरणों का खर्च इसमें शामिल होना चाहिए।

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