फैसले कानून के आधार पर होते हैं, आलोचना नतीजे के आधार पर: जस्टिस राजेश बिंदल
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि न्यायाधीश हमेशा कानून के अनुसार फैसले करते हैं, लेकिन उनकी आलोचना इस आधार पर होती है कि फैसला किसके पक्ष में गया है, खासकर बड़े मामलों में।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में उन्होंने जस्टिस अजय रस्तोगी की उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि आजकल किसी जज को तभी “स्वतंत्र” माना जाता है जब वह सरकार के खिलाफ फैसला दे। इस पर जस्टिस बिंदल ने कहा, “हम सभी कानून के अनुसार ही निर्णय लेते हैं। समस्या यह है कि जो केस जीतता है, वह कहता है कि उसे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, लेकिन जो हारता है, वह अदालत को गलत ठहराता है।”
'क्लीन स्लेट' के साथ मामलों का निपटारा
जस्टिस बिंदल ने कहा कि जजों को हर मामले को “क्लीन स्लेट” के साथ देखना चाहिए और पूर्वाग्रह या पुराने फैसलों से प्रभावित हुए बिना निर्णय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश की।
न्यायिक सुधारों पर जोर
उन्होंने अपने कार्यकाल में किए गए कई सुधारों का भी जिक्र किया, जिनमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण, फॉरेंसिक लैब्स को अदालतों से जोड़ना और रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के कारण होने वाली देरी को कम करना शामिल है। उनका कहना था कि ये कदम ट्रायल और जांच प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने के लिए उठाए गए।
उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटलीकरण की वजह से कोविड-19 महामारी और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के दौरान भी अदालतों का कामकाज जारी रह सका।
वकीलों को दी सलाह
जस्टिस बिंदल ने वकीलों को सलाह देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल केस जीतना नहीं होना चाहिए, बल्कि अदालत को सही कानूनी निष्कर्ष तक पहुंचाने में मदद करना होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अदालत अंतिम मंच है और यहां सही कानून स्थापित होना जरूरी है, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।”
आंतरिक मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा से बचें
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में आने वाली समस्याओं को सार्वजनिक रूप से उठाने के बजाय संस्थान के भीतर ही सुलझाना चाहिए। उनके अनुसार, न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए संवाद जरूरी है, लेकिन वह आंतरिक रूप से होना चाहिए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चेतावनी
जस्टिस बिंदल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह तकनीक उपयोगी है, लेकिन इसका दुरुपयोग भी संभव है, इसलिए इसे जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी
इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जस्टिस बिंदल के करियर की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कार्य करते हुए न्यायिक प्रणाली के विभिन्न पहलुओं को समझा।
उन्होंने कहा कि जस्टिस बिंदल ने न केवल महत्वपूर्ण फैसले दिए, बल्कि न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने में भी अहम योगदान दिया। उन्होंने उनके उन फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया कि बच्चे को संपत्ति की तरह नहीं माना जा सकता, मोटर दुर्घटना मुआवजा सीधे पीड़ित के बैंक खाते में जाना चाहिए, और कानून के समक्ष सभी समान हैं।
निष्कर्ष
अपने संबोधन के अंत में जस्टिस राजेश बिंदल ने बार, सहयोगियों और न्यायालय के कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे अपने न्यायिक करियर की अच्छी यादों के साथ विदा ले रहे हैं।