जजों की कमी के कारण हो रही है ट्रायल में देरी: जस्टिस अभय ओक

Update: 2026-04-17 07:27 GMT

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस अभय एस ओक ने कहा है कि भारत में ट्रायल में हो रही देरी का मुख्य कारण न्यायाधीशों की कमी है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट  ने 2002 में प्रति 10 लाख आबादी पर 50 जज का लक्ष्य तय किया था, लेकिन 2026 में यह संख्या अभी भी केवल 22–23 के आसपास है, इसलिए देरी होना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी, नए प्रकार के मामलों और केस फाइलिंग में वृद्धि के बावजूद जजों की संख्या नहीं बढ़ी, जिससे लंबित मामलों की समस्या गंभीर हो गई है। उन्होंने अधिवक्ता परिषद और बार संगठनों से अपील की कि वे सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगें।

जस्टिस ओका ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी पर भी चिंता जताई। Supreme Court Collegium की सिफारिशों पर सरकार कई बार 9–12 महीने या उससे अधिक समय लेती है, जिससे वकीलों के करियर पर असर पड़ता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि National Judicial Data Grid जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आंकड़ों के कारण भारत की न्याय प्रणाली की स्थिति दुनिया के सामने है, और लगातार देरी से इसकी वैश्विक छवि प्रभावित हो सकती है।

साथ ही उन्होंने अंडरट्रायल कैदियों की लंबी कैद, खराब जेल स्थितियों और जमानत में देरी जैसी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया।

निष्कर्ष: जस्टिस ओका के अनुसार, जब तक न्यायाधीशों की संख्या नहीं बढ़ेगी, तब तक भारत की न्याय प्रणाली में देरी और आलोचना दोनों जारी रहेंगे।

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