सुप्रीम कोर्ट सोमवार (2 नवंबर) को केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने अपना पासपोर्ट वापस करने की मांग की है। हाथरस साजिश मामले में जमानत की शर्तों के तहत उनका पासपोर्ट जमा कराया गया था।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी, क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा था।

इससे पहले, कप्पन ने जमानत की एक शर्त में ढील देने के लिए एक और अर्जी दाखिल की थी। इस शर्त के तहत उन्हें हर सोमवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी। कोर्ट ने इस अर्जी को मंजूर कर लिया था। 9 सितंबर 2022 को, सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस यू.यू. ललित और जस्टिस एस. रवींद्र भट ने कप्पन को जमानत दी थी। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार कर लिया था, जिसमें कप्पन की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

कप्पन 6 अक्टूबर 2020 से हिरासत में थे। उन पर UAPA की धारा 17/18, IPC की धारा 120B, 153A/295A और IT Act की धारा 65/72 के तहत आरोप लगाए गए। उन पर हाथरस में एक दलित नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप और हत्या के बाद दंगे भड़काने की साजिश रचने का आरोप था; वे वहां रिपोर्टिंग करने गए।

सुप्रीम कोर्ट ने कप्पन पर जमानत की निम्नलिखित शर्तें लगाई थीं:

1. याचिकाकर्ता को 3 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट में पेश किया जाएगा और ट्रायल कोर्ट द्वारा उचित समझी जाने वाली शर्तों पर उसे जमानत पर रिहा किया जाएगा।

2. जमानत की एक शर्त यह होगी कि याचिकाकर्ता दिल्ली के जंगपुरा इलाके के अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) में ही रहेगा।

3. याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट की स्पष्ट अनुमति के बिना दिल्ली के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेगा।

4. याचिकाकर्ता को हर सोमवार को स्थानीय पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। यह शर्त पहले 6 हफ्तों तक लागू रहेगी। 6 हफ्तों के बाद याचिकाकर्ता केरल जा सकेगा, लेकिन उसे वहां भी हर सोमवार को स्थानीय पुलिस स्टेशन जाना होगा और वहां रखे रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। अपीलकर्ता को हर दिन खुद या अपने वकील के ज़रिए ट्रायल कोर्ट में हाज़िर होना होगा।

5. अपीलकर्ता को अपना पासपोर्ट जांच एजेंसियों के पास जमा करना होगा। अपीलकर्ता को मिली इस छूट का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और उसे इस विवाद से जुड़े किसी भी व्यक्ति से संपर्क नहीं करना चाहिए।

दिसंबर 2022 में, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने PMLA मामले में कप्पन को ज़मानत दी और फरवरी 2023 में वह जेल से बाहर आ गए।

Case Title : SIDHIQUE KAPPAN v. STATE OF UTTAR PRADESH

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