गुरुग्राम 4 वर्षीय बच्ची रेप मामला: SIT ने जांच पूरी की, अस्पताल की लापरवाही और पीड़िता मुआवजे पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-05-11 11:42 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में 4 वर्षीय बच्ची से रेप मामले में सोमवार को कहा कि वह अस्पतालों की कथित लापरवाही/मिलीभगत और पीड़िता को मुआवजा दिए जाने के मुद्दे पर विचार करेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अब चार्जशीट सक्षम अदालत के समक्ष दाखिल की जाए।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ पीड़ित बच्ची के माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में हरियाणा पुलिस की जांच को असंतोषजनक बताते हुए CBI या SIT जांच की मांग की गई थी।

गौरतलब है कि मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को जांच पटरी से उतारने के लिए कड़ी फटकार लगाई थी और मामले की जांच के लिए SIT गठित की थी। कोर्ट ने कहा था कि पुलिस ने अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश की। अदालत ने पाया था कि प्रथम दृष्टया POCSO Act की धारा 6 के तहत “Aggravated Penetrative Sexual Assault” का मामला बनता था, लेकिन पुलिस ने FIR केवल धारा 10 के तहत “Aggravated Sexual Assault” के लिए दर्ज की, जो अपेक्षाकृत कम गंभीर अपराध है।

तब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि “यह स्पष्ट मामला है जहां पुलिस ने आरोपी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए।” कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस आयुक्त और जांच अधिकारी को जांच से अलग करते हुए एक वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में SIT गठित की थी।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि जांच की असंवेदनशील और गैरकानूनी प्रक्रिया के कारण बच्ची का मानसिक आघात और बढ़ गया। साथ ही बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्यों के रवैये पर भी गंभीर सवाल उठाए गए थे।

सोमवार की सुनवाई में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि SIT जांच पूरी हो चुकी है और वास्तविक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट की प्रति सक्षम अदालत द्वारा पीड़िता के माता-पिता और आरोपी को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि रिपोर्ट पर किसी भी प्रकार की आपत्ति सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार नहीं की जाएगी।

सुनवाई के दौरान मैक्स अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि डॉक्टर ने मेडिकल राय नहीं बदली थी। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के आचरण और उनकी संभावित लापरवाही की भी जांच करेगी।

CJI ने टिप्पणी की, “हमें सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के आचरण की जांच करनी चाहिए… वे कई मामलों में लिप्त रहते हैं।” कोर्ट ने संकेत दिया कि अस्पतालों की कथित लापरवाही या मिलीभगत और पीड़िता को मुआवजा देने के मुद्दे पर आगे विस्तार से विचार किया जाएगा।

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