केंद्र के ग्रेट निकोबार आइलैंड मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने मौखिक रूप से कहा कि संस्कृति को बचाना संविधान से सुरक्षित मौलिक अधिकार है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच केंद्र सरकार की उस चुनौती पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने उस PIL (जनहित याचिका) को सुनवाई योग्य माना था, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रोजेक्ट के लिए सहमति लेने में 'वन अधिकार अधिनियम' (Forest Rights Act) का उल्लंघन हुआ।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी (केंद्र की ओर से) और सीनियर एडवोकेट डॉ. एस. मुरलीधर (प्रतिवादी/PIL याचिकाकर्ता की ओर से) की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया।

सुनवाई के दौरान, बेंच ने गौर किया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने इस मामले पर दो बार कानूनी कार्यवाही हो चुकी है। बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वह NGT के फैसले को हाईकोर्ट के सामने रखे और हाईकोर्ट को ही इस पर फैसला करने दे।

जहां AG वेंकटरमणी ने प्रतिवादी के 'लोकस' (मुकदमा करने के अधिकार) पर सवाल उठाया, वहीं मुरलीधर ने कहा कि 'सुनवाई की योग्यता' (Maintainability) का सवाल अब लगभग बेमानी हो गया, क्योंकि ट्राइबल काउंसिल्स (आदिवासी परिषदों) ने हाई कोर्ट में मामले में पक्षकार बनने की अर्जी दी थी। उन्होंने आगे कहा कि शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों की बात नहीं सुनी गई।

AG ने इस तर्क का विरोध करते हुए कहा कि जनजातियां "सब कुछ जानती थीं" और वे इसमें शामिल हो रही थीं।

इसके बाद जस्टिस बागची ने कहा कि शोम्पेन एक अनोखी जनजाति है, जिसे बचाने की ज़रूरत है।

जज ने टिप्पणी की,

"नहीं तो होता यह है कि अगर आप पूरे अंडमान और निकोबार की आबादी का ढांचा देखें तो ग्रेटर अंडमानी जनजाति मुख्य आबादी के साथ घुल-मिल गई है। या तो हम उन्हें पूरी तरह से मुख्यधारा में मिला दें या फिर उन्हें उनकी अनोखी पहचान और उनकी संस्कृति की पहचान के साथ रहने दें। संस्कृति को बचाना संविधान से सुरक्षित मौलिक अधिकार है।"

AG ने इस टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि शोम्पेन जनजातियां 'संरक्षित जनजातियां' नहीं हैं, बल्कि वे मुख्यधारा के साथ घुल-मिल गई हैं। आखिरकार, बेंच ने यह देखते हुए मामले का निपटारा कर दिया कि मुख्य मामले की सुनवाई 25-26 नवंबर को हाई कोर्ट में होनी है।

Case Title : Union of India v. Meena Gupta and Ors.

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: