'पुलिस के पास जाएं, सिस्टम पर भरोसा रखें': पैगंबर के खिलाफ़ टिप्पणियों पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-07-06 12:38 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने एक इन्फ्लुएंसर द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ़ कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में कार्रवाई की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार किया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे पहले पुलिस अधिकारियों से संपर्क करें और सिस्टम पर भरोसा रखें।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच ने AoR अंसार अहमद चौधरी द्वारा दायर PIL को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया। इस मामले का ज़िक्र एडवोकेट रजत कुमार ने बेंच के सामने किया था, जिन्होंने कहा कि इन टिप्पणियों से सांप्रदायिक अशांति फैल सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर नाज़िया इलाही खान ने जून में पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर मोहम्मद और उनके परिवार के खिलाफ़ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की थीं, जिनके क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इस घटना के बाद इन्फ्लुएंसर के खिलाफ़ कई FIR दर्ज की गईं।

याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रक्रिया और स्थानीय अधिकारियों को नज़रअंदाज़ करके सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के चलन पर सवाल उठाते हुए जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा,

"क्या आपने कोई केस दर्ज कराया? पुलिस मौजूद है। हमारे सिस्टम पर भरोसा रखें। हम सिर्फ़ शीर्ष अदालत हैं, हम निगरानी के लिए हैं। यह हमारे लिए भी यह देखने का मौका है कि क्या हमारे निचले स्तर के अधिकारी काम कर रहे हैं या नहीं? अगर यहाँ सब कुछ शॉर्ट-सर्किट हो जाएगा तो वे भी हाथ खड़े कर देंगे कि ठीक है...यही तो हो रहा है...सभी संस्थान गड़बड़ा रहे हैं क्योंकि सब कुछ ऊपर से ही आता है।"

जज ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी चीज़ों को सनसनीखेज़ नहीं बनाया जाना चाहिए और कहा कि अगर सामान्य प्रक्रिया से उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो इस मुद्दे को उठाया जा सकता है।

"यह एक गंभीर मामला है, मैं आपसे सहमत हूँ...अपनी बात करूँ तो मैं इसे लेकर बहुत संवेदनशील हूँ...लेकिन एक प्रक्रिया भी होती है। अगर वह काम न करे तो हमारे पास आएं। संवेदनशील मामलों में आप सबसे पहले भारत के नागरिक हैं, आपको इसके नतीजों को समझना चाहिए। आप वकील हैं...आप कानून जानते हैं। आप परिणाम समझते हैं। इन चीज़ों को सनसनीखेज़ न बनाएं। अगर किसी एक व्यक्ति ने गलती की है तो कानून की पूरी ताकत से उस पर कार्रवाई करें।"

इस PIL में भारत सरकार के गृह विभाग, MeitY, YouTube, Facebook, X और नाज़िया इलाही खान को पक्षकार बनाया गया है। यह याचिका इन राहतों की मांग के लिए दायर की गई-

- डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट के पब्लिकेशन, सर्कुलेशन और प्रसार को रोकने, रेगुलेट करने और उन पर लगाम लगाने के लिए उचित गाइडलाइंस/रेगुलेशन बनाने और लागू करने के निर्देश, जो जानबूझकर सम्मानित धार्मिक हस्तियों (जिनमें पैगंबर मुहम्मद और भगवान श्री राम शामिल हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं) के प्रति अपमानजनक, आपत्तिजनक या बेइज्जती करने वाले हों।

- अधिकारियों को ऐसे ज़रूरी कदम उठाने के निर्देश ताकि यह पक्का किया जा सके कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का जानबूझकर गलत इस्तेमाल करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और समुदायों के बीच अशांति फैलाने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाएं।

- अधिकारियों को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे YouTube, Facebook, Instagram, और X, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं) से सभी अपमानजनक वीडियो और उनसे जुड़ी सभी पोस्ट/पब्लिकेशन/आरोपों, या ऐसे किसी भी अन्य वीडियो/पोस्ट/पब्लिकेशन/आरोप की पहचान करने, उन्हें हटाने और डिलीट करने के लिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश, ताकि ऐसे वीडियो के बड़े पैमाने पर फैलने से कोई अप्रिय घटना न हो।

Case Title: MD ANAS CHAUDHARY v. UNION OF INDIA UNION OF INDIA DEPARTMENT OF HOME PRINCIPAL SECRETARY, WP(Crl) Diary No. 39051/2026

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