चारा घोटाला मामला: लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI, 22 अप्रैल को होगी सुनवाई

Update: 2026-02-17 11:05 GMT

सुप्रीम कोर्ट अप्रैल में झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों के एक समूह पर सुनवाई करेगा, जिसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और चारा घोटाले के अन्य दोषियों की सजा निलंबित की गई थी।

जस्टिस एम.एम. सुंद्रेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने मामलों को अंतिम निपटान के लिए 22 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध किया है।

केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि यह महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न से जुड़ा मामला है और हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि के बाद सजा निलंबन से संबंधित स्थापित सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि सजा निलंबित नहीं की जानी चाहिए थी और लालू यादव सहित अन्य आरोपी अवैध रूप से बाहर हैं। वहीं, लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मामले की जल्द सुनवाई का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित मामलों में कुछ आरोपियों को अभी नोटिस नहीं मिला है और कुछ ने जवाब दाखिल नहीं किया है।

जस्टिस सुंद्रेश ने कहा कि संबंधित व्यक्तियों की आयु 60, 70 और 80 वर्ष से अधिक हो चुकी है, इसलिए मामले को अप्रैल में सुनवाई के लिए तय किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों में आरोपी की मृत्यु हो चुकी है, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।

चारा घोटाला कई मामलों से जुड़ा है, जिनमें 1992 से 1995 के बीच राज्य कोषागार से लगभग ₹950 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप है, जब लालू यादव अविभाजित बिहार के मुख्यमंत्री थे और पशुपालन व वित्त विभाग भी उनके पास था। आरोप है कि पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारा, दवाइयों आदि के फर्जी बिलों के आधार पर धन निकाला। लालू यादव को देवघर, दुमका और चाईबासा कोषागारों से धोखाधड़ीपूर्ण निकासी से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था, जो वर्तमान झारखंड में स्थित हैं।

झारखंड हाईकोर्ट ने अप्रैल 2021 में दुमका कोषागार से ₹3.13 करोड़ की अवैध निकासी से जुड़े मामले में लालू यादव को आधी सजा पूरी होने के आधार पर जमानत दी थी। इससे पहले 2019 में देवघर कोषागार मामले और अक्टूबर 2020 में चाईबासा कोषागार मामले में भी उन्हें इसी आधार पर जमानत मिल चुकी थी।

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