Digital Arrest | पीड़ितों का नुकसान बैंकों या टेलीकॉम कंपनियों की लापरवाही से हुआ तो उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा: MHA समिति
“डिजिटल अरेस्ट” घोटालों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले के बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने इन मामलों के सभी पहलुओं की व्यापक जांच के लिए एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति गठित की है।
यह समिति गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में कार्य करेगी। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), दूरसंचार विभाग (DoT), विदेश मंत्रालय (MEA), वित्तीय सेवाएं विभाग, कानून एवं न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), दिल्ली पुलिस तथा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के संयुक्त सचिव स्तर या उससे ऊपर के अधिकारी शामिल होंगे।
I4C के CEO इस समिति के सदस्य-सचिव होंगे और आवश्यकता अनुसार अन्य विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जा सकेगा। समिति की बैठक हर दो सप्ताह में होगी और अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि भी इसमें भाग लेंगे।
समिति के कार्य
समिति को निम्नलिखित जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं—
प्रवर्तन एजेंसियों को आने वाली वास्तविक समय की समस्याओं की जांच
अमीकस क्यूरी (Amicus) की सिफारिशों और कोर्ट के निर्देशों पर विचार
संबंधित कानूनों, नियमों, परिपत्रों और उनके क्रियान्वयन में खामियों की पहचान
सुधारात्मक उपायों का सुझाव देना और आगे के न्यायिक निर्देशों के लिए इनपुट देना
पहली बैठक में क्या हुआ?
29 दिसंबर को हुई पहली बैठक में—
CBI ने सुझाव दिया कि मामलों के लिए एक आर्थिक सीमा (monetary threshold) तय की जाए। इससे ऊपर के मामलों को CBI संभाले और नीचे के मामलों को राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की एजेंसियां MHA की सहायता से देखें।
RBI ने बताया कि बैंकों को AI आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली अपनाने की सलाह दी गई है और संदिग्ध खातों को फ्रीज़ करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लगभग तैयार है।
MeitY ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 46 के तहत निर्णयन तंत्र को मजबूत और सक्रिय करने की आवश्यकता बताई।
DoT ने बताया कि टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत मसौदा नियम तैयार हो चुके हैं, जो लापरवाही से सिम कार्ड जारी करने, एक व्यक्ति को कई सिम देने जैसी समस्याओं से निपटेंगे।
I4C ने बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल और अपराध से प्राप्त धन को शीघ्र फ्रीज़ करने के लिए नई SOP पर काम होने की जानकारी दी। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और 1930 हेल्पलाइन के सुधार पर भी काम चल रहा है।
पीड़ितों के मुआवजे पर जोर
समिति ने अमीकस की उस सिफारिश पर भी सहमति जताई कि यदि बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों या अन्य नियंत्रित संस्थाओं की लापरवाही या धोखाधड़ी से पीड़ितों को नुकसान हुआ है, तो उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कहा गया कि पीड़ितों को प्रणालीगत विफलताओं के कारण नुकसान नहीं उठाना चाहिए और मुआवजा तंत्र अन्य कानूनी उपायों से स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए। इसके लिए RBI, DoT और MeitY को मौजूदा व्यवस्थाओं में सुधार के सुझाव देने को कहा गया है।
आगे की कार्यवाही
MHA ने सुप्रीम कोर्ट से कम से कम एक महीने का समय मांगा है ताकि समिति और विचार-विमर्श कर सके और विस्तृत सुझाव दे सके। मामला अब 20 जनवरी को फिर से सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध है।