सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत की एक शर्त में ढील दी। इस शर्त के तहत दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में आरोपी मीरान हैदर को हफ़्ते में दो बार पुलिस स्टेशन क्राइम ब्रांच, जय सिंह मार्ग, नई दिल्ली में अपनी हाज़िरी लगानी पड़ती थी। कोर्ट ने अब उन्हें हर शनिवार को एक बार हाज़िरी लगाने की इजाज़त दी।

उन्हें अपनी शादी के कारण 17 और 24 अक्टूबर को हाज़िरी लगाने से भी छूट दी गई।

बता दें, जस्टिस कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने 5 जनवरी को हैदर और चार अन्य सह-आरोपियों को ज़मानत दी थी। बेंच ने ज़मानत की 11 शर्तें लगाई थीं, जिनमें यह भी शामिल था कि आरोपी सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट नहीं कर सकते, सार्वजनिक सभाओं में शामिल नहीं हो सकते और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक या फिजिकल रूप में कोई पोस्ट या सामग्री नहीं फैला सकते।

शर्त 5 (हाज़िरी), 8 (सभा में शामिल न होना) और 9 (पोस्टर फैलाना) में ढील की मांग करते हुए मीरान ने एक मिसलेनियस एप्लीकेशन (विविध आवेदन) दायर की, जिस पर सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल ने बहस की। उन्होंने कहा कि हफ़्ते में दो बार हाज़िरी लगाने के बजाय, मीरान को हर हफ़्ते शनिवार को हाज़िरी लगाने की इजाज़त दी जा सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी नौकरी करना चाहता है, इसलिए हफ़्ते के दिनों में हाज़िरी लगाने में मुश्किल होगी। इसके अलावा, ज़मानत की अन्य शर्तों में भी ढील की मांग की गई।

शुरुआत में, जस्टिस कुमार ने कहा:

"हम किसी भी शर्त में ढील नहीं देंगे, सिवाय उस शर्त के जिसमें कहा गया कि उन्हें अपनी हाज़िरी लगानी है; उस पर हम सोच सकते हैं कि इसे हफ़्ते में एक बार या 10 दिनों में एक बार किया जाए।"

जज ने यह भी सवाल किया कि आरोपी नौकरी कैसे करना चाहता है, जबकि उसने एप्लीकेशन में कहा है कि वह पीएचडी करना चाहता है।

अन्य शर्तों के बारे में अग्रवाल ने तर्क दिया कि ज़मानत की शर्तों 8 और 9 को शर्त 6 में जोड़ा जा सकता है, जिसके तहत उन्हें किसी गवाह को प्रभावित करने की इजाज़त नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने इन शर्तों में कोई ढील देने से इनकार किया। चूंकि सुनवाई के समय एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू (दिल्ली पुलिस की ओर से) मौजूद नहीं थे, इसलिए मामले को टाल दिया गया। आखिरकार, ASG राजू आए और उन्होंने याचिका का विरोध किया। उन्होंने मज़ाक-मज़ाक में कहा कि आरोपी "पुलिस स्टेशन में शादी कर सकता है"। हालांकि, अग्रवाल ने इस तरह के बयानों पर आपत्ति जताई।

अंत में, कोर्ट ने एक आदेश पारित किया:

"यह आवेदन 5.1.2026 की शर्तों 2, 5, 8 और 9 में बदलाव की मांग के लिए दायर किया गया। पक्षों की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों - याचिकाकर्ता के लिए मिस्टर सिद्धार्थ अग्रवाल और दिल्ली पुलिस के लिए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू - को सुनने के बाद हम शर्तों 2, 8 और 9 में बदलाव की मांग पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा बताई गई कठिनाई को देखते हुए हमारा मानना ​​है कि याचिकाकर्ता को हर शनिवार सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच स्टेशन हाउस ऑफिसर, पुलिस स्टेशन क्राइम ब्रांच, दिल्ली पुलिस, पुलिस कमिश्नर कार्यालय, पुलिस मुख्यालय, जय सिंह मार्ग, नई दिल्ली - 110001 के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश देना ही काफी होगा। इस हद तक आवेदन स्वीकार किया जाता है। याचिकाकर्ता की शादी होने की बात को देखते हुए उन्हें 17.10.26 और 24.10.26 को संबंधित पुलिस के सामने पेश होने से छूट दी जाती है।"

वे संबंधित शर्तें जिन पर मीरान ने ढील मांगी थी, नीचे दी गई हैं:

v. सभी अपीलकर्ताओं, यानी गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मो. सलीम खान और शादाब अहमद को व्यक्तिगत रूप से सप्ताह में दो बार, यानी सोमवार और गुरुवार को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच स्टेशन हाउस ऑफिसर, पुलिस स्टेशन क्राइम ब्रांच, दिल्ली पुलिस, पुलिस कमिश्नर कार्यालय, पुलिस मुख्यालय, जय सिंह मार्ग, नई दिल्ली - 110001 के सामने पेश होना होगा और अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। स्टेशन हाउस ऑफिसर इन सभी अपीलकर्ताओं के लिए उपस्थिति का एक अलग रजिस्टर रखेंगे और ट्रायल कोर्ट को मासिक अनुपालन रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसे मामले के मुख्य रिकॉर्ड में रखा जाएगा।

viii. अपील करने वालों को ट्रायल खत्म होने तक किसी भी प्रोग्राम, भाषण, सभा, रैली या मीटिंग में हिस्सा नहीं लेना चाहिए, चाहे वह फिजिकली हो या वर्चुअली।

ix. अपील करने वाले किसी भी तरह की पोस्ट (चाहे इलेक्ट्रॉनिक हो या फिजिकल) या हैंडबिल, पोस्टर, बैनर वगैरह नहीं फैलाएंगे।

हैदर उन एक्टिविस्ट्स में से एक हैं, जो 2019-2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में सबसे आगे थे। उन पर 'गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम' (UAPA) और 'भारतीय दंड संहिता' (IPC) के तहत आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने फरवरी 2020 के आखिरी हफ्ते में राजधानी में हुए सांप्रदायिक दंगों के पीछे की "बड़ी साजिश" रची थी।

Case Details: MEERAN HAIDER Vs STATE GOVT. OF NCT OF DELHI|MA 2837/2026 in Crl.A. No. 12/2026 Diary No. 54215 / 2026

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