अनुच्छेद 21 विदेशियों पर भी लागू होता है: सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानतदार न होने के कारण ज़मानत नहीं ले पा रही युगांडा की महिला को राहत दी
सुप्रीम कोर्ट ने युगांडा की महिला को राहत दी, जो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट (NDPS Act) के तहत एक मामले में ज़मानत मिलने के बावजूद जेल में बंद थी, क्योंकि वह एक सक्षम ज़मानतदार (Solvent Surety) पेश नहीं कर पाई।
यह देखते हुए कि संविधान का अनुच्छेद 21 विदेशियों पर भी लागू होता है, कोर्ट ने उसे निजी मुचलके पर रिहा करने की अनुमति दी।
कोर्ट ने कहा कि जब ज़मानत का मामला बनता है तो ज़मानत बांड जमा करने या सक्षम ज़मानतदार पेश करने जैसी वित्तीय बाधाएं आरोपी की रिहाई में रुकावट नहीं बननी चाहिए।
कोर्ट ने कहा,
"एक बार जब कोई आरोपी ज़मानत का हकदार साबित हो जाता है तो वित्तीय कठिनाइयों जैसे कारक उसकी ज़मानत पर रिहाई में बाधा नहीं बनने चाहिए।"
NDPS मामले में युगांडा की महिला को ज़मानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ कस्टम विभाग की अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच को पता चला कि आरोपी युगांडा की महिला अभी भी तिहाड़ जेल में बंद है, क्योंकि वह हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई ज़मानत की शर्त के अनुसार एक सक्षम ज़मानतदार पेश करने में नाकाम रही थी।
उसे राहत देते हुए बेंच ने माना कि "कई बार, कोई आरोपी अपनी वित्तीय बाधाओं आदि के कारण ज़मानत और उतनी ही राशि का सक्षम ज़मानतदार पेश करने की स्थिति में नहीं हो सकता है,"। ऐसी वित्तीय बाधाएं तब आड़े नहीं आनी चाहिए, जब ज़मानत का मामला बनता हो।
कोर्ट ने कहा,
"यह एक महिला आरोपी का मामला है, जो विदेशी नागरिक है। हालांकि, यह तथ्य बना रहता है कि संविधान का अनुच्छेद 21 उस विदेशी नागरिक पर भी लागू होगा जिस पर इस देश में आरोपी के तौर पर मुक़दमा चलाया जा रहा हो।"
विदेशी नागरिक होने के कारण आरोपी के लिए सक्षम ज़मानतदार पेश करने में आने वाली कठिनाई को स्वीकार करते हुए बेंच ने उसे 25,000 रुपये का निजी ज़मानत बांड जमा करने पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा,
“हमारा मानना है कि प्रतिवादी-आरोपी से 25,000/- रुपये (केवल पच्चीस हज़ार रुपये) की राशि का एक निजी मुचलका (Personal Bond) जमा करने के लिए कहा जाना चाहिए। 25,000/- रुपये का निजी मुचलका जमा करने पर जेल अधिकारी उसे तिहाड़ जेल से रिहा कर देंगे।”
अदालत ने आगे निर्देश दिया कि प्रतिवादी-आरोपी के जेल से रिहा होने पर उसे एक डिटेंशन सेंटर (नजरबंदी केंद्र) में ले जाया जाएगा, जब तक कि उसके खिलाफ NDPS मामले में मुकदमा चल रहा है।
“आरोपी का दोष या उसकी बेगुनाही पूरी तरह से उन सबूतों के आधार पर तय की जाएगी, जो रिकॉर्ड पर आएंगे,” अदालत ने स्पष्ट किया और ट्रायल कोर्ट से कहा कि वह हाईकोर्ट की टिप्पणियों से किसी भी तरह प्रभावित हुए बिना मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाए।
इस प्रकार अपील का निपटारा किया गया।
Cause Title: THE CUSTOMS VERSUS FARIDAH NAKANWAGI