सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने विकलांगता के कारण मिलिट्री ट्रेनिंग से हटाए गए कैडेट्स के लिए स्किल ट्रेनिंग कोर्स का प्रस्ताव रखा
केंद्र सरकार ने उन कैडेट्स के लिए नौकरी-उन्मुख स्किल ट्रेनिंग की एक योजना का प्रस्ताव दिया, जिन्हें विकलांगता के कारण मिलिट्री ट्रेनिंग से हटा दिया गया। इन कैडेट्स की विकलांगता 40% से कम है, इसलिए वे 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के तहत आरक्षण के प्रावधानों के दायरे में नहीं आते हैं।
रक्षा मंत्रालय ने कोर्ट के निर्देश के जवाब में हलफनामा दायर किया। इसमें ऐसे कैडेट्स के लिए उपयुक्त कल्याणकारी व्यवस्था तैयार करने की बात कही गई। मंत्रालय ने 8-10 सप्ताह के स्ट्रक्चर्ड कोर्स का प्रस्ताव दिया ताकि ये कैडेट्स मिलिट्री ट्रेनिंग से कॉर्पोरेट और प्रशासनिक नौकरियों की ओर बढ़ सकें।
यह हलफनामा मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान विकलांग हुए कैडेट्स से जुड़े स्वतः संज्ञान (suo motu) वाले मामले में दायर किया गया।
हलफनामे में कहा गया कि 'पूर्व-सैनिक कल्याण विभाग' के तहत काम करने वाले 'पुनर्वास महानिदेशालय' (DGR) ने 25 अगस्त, 2026 को एक्शन प्लान का ड्राफ्ट तैयार किया। यह सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद किया गया, जिसमें 40% से कम बेंचमार्क विकलांगता वाले कैडेट्स के लिए एक उपयुक्त योजना तैयार करने को कहा गया।
कोर्स को कैडेट्स की शैक्षणिक योग्यता (ग्रेजुएट और नॉन-ग्रेजुएट) और विषय (टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल) के आधार पर बांटा जाएगा। मंत्रालय का प्रस्ताव है कि कैडेट्स को उनकी योग्यता, मेडिकल फिटनेस और रुझान (Aptitude) के आधार पर कोर्स के लिए नॉमिनेट किया जाए।
ड्राफ्ट प्लान में कहा गया कि 4-8 सप्ताह का कोर्स केवल बेसिक ओरिएंटेशन देगा और 'नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन्स फ्रेमवर्क' के तहत जरूरी हैंड्स-ऑन या ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग नहीं दे पाएगा। इसलिए इसमें मौजूदा DGR पुनर्वास कोर्स के अनुरूप 8-10 सप्ताह के कोर्स का प्रस्ताव दिया गया, जिसका मकसद सर्टिफाइड और प्लेसमेंट के लिए तैयार स्किल प्रदान करना है।
प्रस्तावित कोर्स में शामिल हैं: साइबर सिक्योरिटी और आईटी सपोर्ट, सोलर पीवी सिस्टम डिजाइन, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और PLC/SCADA, डेटा एनालिटिक्स और बिजनेस इंटेलिजेंस, RPAS/ड्रोन पायलट और ऑपरेशन्स, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस, रिटेल स्टोर और ऑपरेशन्स मैनेजमेंट, कॉर्पोरेट और प्राइवेट सिक्योरिटी मैनेजमेंट, एचआर और ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन, इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन कोर्स, ऑटोमोबाइल सर्विस टेक्नीशियन, सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, CCTV और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, एसी और रेफ्रिजरेशन, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स असिस्टेंस, हॉस्पिटैलिटी और हाउसकीपिंग, प्रोफेशनल ड्राइविंग और फ्लीट ऑपरेशन्स, और फायर और इंडस्ट्रियल सेफ्टी। कोर्स की अनुमानित लागत हर कैडेट के लिए ₹15,000 से ₹55,000 के बीच है।
ड्राफ्ट में कहा गया कि ये लागतें नेशनल स्किल डेवलपमेंट काउंसिल और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के मौजूदा शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग नियमों पर आधारित हैं। इन्हें नेशनल स्किल डेवलपमेंट काउंसिल के साथ बातचीत करके तय किया जाएगा। यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, और रहने-खाने का खर्च (जहां भी लागू हो) अलग से होगा।
ड्राफ्ट स्कीम में प्रस्ताव है कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ रीसेटलमेंट (DGR) कोर्स डिज़ाइन करे और चलाए, जबकि डिपार्टमेंट ऑफ़ मिलिट्री अफेयर्स का कोई अधिकारी हर ट्रेनिंग साइकल के लिए योग्य कैडेट्स को नॉमिनेट करे। इसमें ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ़ मिलिट्री अफेयर्स/डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेंस से खास बजट सपोर्ट की भी मांग की गई।
DGR ने कैडेट्स को नॉमिनेट करने के लिए ज़िम्मेदार अथॉरिटी, उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, मौजूदा स्किल्स, वोकेशनल पसंद, एप्टीट्यूड और मेडिकल या फंक्शनल सीमाओं की जांच करने की प्रक्रिया, और योग्यता की जांच करने व ट्रेनिंग का पूरा खर्च उठाने के लिए ज़िम्मेदार अथॉरिटी के बारे में भी फैसले की मांग की।
मंत्रालय ने कोर्ट को यह भी बताया कि उसने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के साथ कई MoU किए ताकि एक्स-कैडेट्स उन डिग्री कोर्स को जारी रख सकें जिनमें उन्होंने मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान एनरोल किया।
हलफनामे के अनुसार, इन इंतज़ामों का मकसद अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के सही सेमेस्टर में लेटरल एंट्री को आसान बनाना, मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान हासिल किए गए एकेडमिक क्रेडिट्स को मान्यता देना और उनका ट्रांसफर करना, और एकेडमिक समय का कम से कम या बिल्कुल नुकसान किए बिना डिग्री प्रोग्राम पूरा करना है।
हलफनामे में डिसेबिलिटी पेंशन और एक्स-सर्विसमैन (ESM) स्टेटस पर सरकार का रुख भी बताया गया। इसमें कहा गया कि मेडिकल कारणों से सेवा से हटाए गए एक्स-कैडेट्स को ESM स्टेटस देने का प्रस्ताव 2011 में प्रोसेस किया गया, लेकिन डिपार्टमेंट ऑफ़ एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर (DESW) ने इसे स्वीकार नहीं किया।
2022 में ऑफिसर रेट पर डिसेबिलिटी पेंशन देने का एक अलग प्रस्ताव इस आधार पर स्वीकार नहीं किया गया कि मौजूदा पॉलिसी ऐसे कैडेट्स को डिसेबिलिटी पेंशन देने की इजाज़त नहीं देती है और ऐसा करना मुमकिन नहीं है।
मंत्रालय का यह भी कहना है कि मौजूदा पॉलिसी के तहत एक्स-कैडेट्स को ESM स्टेटस नहीं दिया जा सकता है। हालांकि, उसने 4 जून, 1997 के DoPT ऑफिस मेमोरेंडम का ज़िक्र किया, जिसमें मेडिकल कारणों से सेवा से हटाए गए कैडेट्स को सिविल नौकरी के लिए प्रायोरिटी नंबर 1 में रखा गया। 2022 की बैठक में इस प्रावधान को दोहराने और ऐसे कैडेट्स को केवल सिविलियन नौकरी पाने के मकसद से सर्टिफिकेट जारी करने का प्रस्ताव रखा गया।
Case Title – In Re: Cadets Disabled In Military Training Struggle