TMC के बैंक खाते फ्रीज करने में दिखाई गई जल्दबाजी पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने जताई चिंता, तत्काल राहत देने से किया इनकार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खाते फ्रीज किए जाने के मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के एक दिन के भीतर खाते फ्रीज करने में दिखाई गई जल्दबाजी चिंता का विषय है। अदालत ने यह भी कहा कि शिकायत "सामान्य (Omnibus)" प्रतीत होती है, जिसमें न तो कोई ठोस आरोप हैं और न ही तारीख या नाम का स्पष्ट उल्लेख है।
हालांकि, जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने फिलहाल TMC को अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए जांच एजेंसी को फ्रीज किए गए खातों की कुल राशि (Corpus) और जांच के दौरान एकत्र किए गए सभी दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
TMC की ओर से सीनियर एडवोकेट किशोर दत्ता और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि केवल अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पार्टी के आठ बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए, जिससे पार्टी की वित्तीय गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। उनका कहना था कि एफआईआर केवल "उचित संदेह" (Reasonable Suspicion) पर आधारित है और BNSS की धारा 106 पुलिस को बैंक खाते फ्रीज करने का अधिकार नहीं देती।
वहीं, राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि धन का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने अदालत से कहा कि जांच सामग्री अदालत के समक्ष रखी जाएगी, जो "अदालत के अंतःकरण को झकझोर सकती है।"
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया शिकायत में विशिष्ट आरोप, तारीख या नाम का अभाव है और इससे आपराधिक मामले की नींव बहुत मजबूत नहीं दिखती। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस चरण पर वह आरोपों की सत्यता की जांच नहीं करेगी और पहले जांच एजेंसी के रिकॉर्ड देखने के बाद ही अंतरिम राहत पर निर्णय लेगी।