वीजा अवधि से अधिक रुकने की आरोपी बांग्लादेशी हिंदू महिला को राहत नहीं, धार्मिक उत्पीड़न का दावा साबित करना होगा: कलकत्ता हाईकोर्ट

Update: 2026-05-07 06:03 GMT

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बांग्लादेशी हिंदू महिला के खिलाफ अवैध रूप से भारत में रहने के मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न की शिकार होने के कारण उसे कानूनी संरक्षण मिल सकता है या नहीं, इसका फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी ने कहा कि Immigration and Foreigners (Exemption) Order, 2025 के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को संरक्षण दिया गया है, लेकिन यह साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी पर है कि वह इस छूट की पात्र है।

मामला बांग्लादेश के खुलना जिले की रहने वाली 27 वर्षीय संपा सरकार से जुड़ा है। उसने दावा किया कि वह 7 दिसंबर 2024 को वैध पासपोर्ट और वीजा के साथ भारत आई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से विवाह कर पश्चिम बंगाल में रहने लगी। उसका वीजा 6 जनवरी 2025 को समाप्त हो गया था।

महिला ने कहा कि शादी के बाद उसे पति और ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया गया। जब उसने पुलिस में शिकायत करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ ही Immigration and Foreigners Act, 2025 के तहत मामला दर्ज कर दिया गया।

राज्य सरकार ने दलील दी कि महिला भारत टूरिस्ट वीजा पर आई थी और धार्मिक उत्पीड़न का दावा उसने बाद में केवल कार्रवाई से बचने के लिए किया। हाईकोर्ट ने कहा कि “धार्मिक उत्पीड़न के डर” को साबित करने के लिए विश्वसनीय साक्ष्य और गवाही आवश्यक होगी।

अदालत ने कहा कि इस स्तर पर कार्यवाही रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता और मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।

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