हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत, आरोपी को खुद के खिलाफ सबूत देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट

Update: 2026-06-12 07:02 GMT

कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को विधायक हस्ताक्षर जालसाजी मामले में तीन सप्ताह तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें पश्चिम बंगाल सीआईडी जांच में सहयोग करने और गुरुवार शाम 6 बजे जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया।

जस्टिस कौशिक चंदा ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी को ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो उसके खिलाफ सबूत के रूप में इस्तेमाल हो सकते हों। अदालत ने कहा कि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत प्राप्त आत्म-दोषारोपण (Self-Incrimination) से संरक्षण के अधिकार का उल्लंघन होगा।

मामला विधानसभा चुनावों के बाद विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) की नियुक्ति से संबंधित एक प्रस्ताव में टीएमसी विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से जुड़ा है। राज्य सरकार का आरोप है कि कई विधायकों ने उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है और हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं।

अभिषेक बनर्जी की ओर से दलील दी गई कि वह उस समय विधायक नहीं थे, बल्कि पार्टी के महासचिव के रूप में केवल विधायकों के निर्णय की सूचना स्पीकर को दी थी। वहीं राज्य ने दावा किया कि मूल प्रस्ताव बार-बार नोटिस देने के बावजूद प्रस्तुत नहीं किया गया और उसकी बरामदगी के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दस्तावेज की बरामदगी के लिए जांच एजेंसी के पास तलाशी और जब्ती (Search and Seizure) की कानूनी शक्तियां उपलब्ध हैं और आरोपी को दस्तावेज देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने माना कि विधानसभा की गरिमा से जुड़े आरोप गंभीर हैं और उनकी जांच जरूरी है, लेकिन बनर्जी की जांच में सहयोग करने की तत्परता को देखते हुए उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम राहत दी गई। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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