बेलडांगा हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, CAPF के तत्काल इस्तेमाल का आदेश
बेलडांगा में हालिया हिंसा से जुड़े मामले की पोस्ट-लंच सुनवाई में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह मुर्शिदाबाद में पहले से तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) का तुरंत उपयोग करे, ताकि हालात पर काबू पाया जा सके और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
चीफ जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने अपने विस्तृत आदेश में सभी पक्षों की अहम दलीलों को दर्ज करते हुए कहा कि “मुर्शिदाबाद में बार-बार हो रही घटनाएं चिंताजनक हैं।” बेंच ने जोर देकर कहा कि राज्य को क्षेत्र के नागरिकों के “जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा और संपत्ति” की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार स्वतंत्र रूप से राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की धारा 6(5) के तहत जांच शुरू करने पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
याचिका और दलीलें
यह मामला लंबित जनहित याचिका (PIL) में दायर एक अंतरिम आवेदन (CAN) पर सुनवाई के दौरान आया, जिसे नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने दाखिल किया था। याचिका में केंद्रीय बलों की तैनाती और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच की मांग की गई थी।
प्री-लंच सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि जिला सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील है और पहले भी दंगे हो चुके हैं। उनका आरोप था कि हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और “एथनिक क्लीनजिंग” जैसा पैटर्न उभर रहा है।
वकील ने कहा, “घटनाएं न तो इक्का-दुक्का हैं और न ही अचानक; यह एक पूर्व-नियोजित अभियान का संकेत देती हैं। शुक्रवार को हिंसा का पैटर्न चयनात्मक लक्ष्यीकरण और एथनिक क्लीनजिंग की मंशा दर्शाता है।”
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने कहा कि स्थिति पर काबू पा लिया गया है और इलाके में शांति है। उसने यह भी कहा कि यदि जरूरत हो तो अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती पर उसे आपत्ति नहीं है। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने याचिका को “राजनीतिक हित याचिका” बताते हुए विरोध किया।
राज्य ने बताया कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को गिरफ्तार किया है और चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। 16 जनवरी के बाद किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है और “बाजार व सामान्य जनजीवन सामान्य है।”
राज्य ने इस आरोप का भी खंडन किया कि तैनात केंद्रीय बलों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा, यह कहते हुए कि रैपिड एक्शन फोर्स और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
कोर्ट की टिप्पणियां और निर्देश
दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला लोगों के जीवन से जुड़ा है, इसलिए इस चरण में अंतरिम आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने अपने आदेश में निम्नलिखित प्रमुख निर्देश दर्ज किए:
राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर घटनाओं और उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए शपथपत्र दाखिल करेगी।
संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला मजिस्ट्रेट (DM) यह सुनिश्चित करेंगे कि नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा और संपत्ति को कोई खतरा न हो।
राज्य सरकार मुर्शिदाबाद में तैनात केंद्रीय सशस्त्र बलों का पूर्ण उपयोग करेगी ताकि सामान्य स्थिति बनी रहे।
केंद्र सरकार NIA अधिनियम की धारा 6(5) के तहत जांच को लेकर उचित निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बलों की तैनाती में यह आदेश बाधा नहीं बनेगा।
अदालत ने कहा, “हमारी राय में मुर्शिदाबाद में बार-बार हो रही घटनाएं चिंताजनक हैं। प्रभावी और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है… राज्य को वहां तैनात केंद्रीय बलों का उपयोग करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।”
बताया गया है कि बेलडांगा में हिंसा पिछले सप्ताह तब भड़की, जब झारखंड में कथित रूप से मारे गए 36 वर्षीय प्रवासी मजदूर का शव मुर्शिदाबाद के उसके गांव लाया गया। इसके बाद बिहार में एक अन्य प्रवासी मजदूर पर हमले की खबरों से स्थिति और बिगड़ गई।
मामले की अगली सुनवाई शपथपत्र दाखिल होने के बाद सूचीबद्ध की गई है।