मनी लॉन्ड्रिंग मामला: PMLA कोर्ट ने झारखंड सीएम हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज की

Update: 2026-06-09 05:47 GMT

रांची में PMLA (प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत बनी स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज की। यह मामला रांची के बड़गाई इलाके में 8.86 एकड़ ज़मीन से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है।

कोर्ट ने माना कि मामले में ट्रायल (मुकदमा) चलाने के लिए शुरुआती तौर पर पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

सोरेन ने पिछले साल दिसंबर में डिस्चार्ज याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और उनके समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले में बेवजह फंसाया गया और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पास उन पर मुकदमा चलाने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है।

ED ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूत और दस्तावेज़ मामले को ट्रायल तक ले जाने के लिए काफी हैं। एजेंसी ने कोर्ट से डिस्चार्ज याचिका खारिज करने और कार्यवाही जारी रखने का आग्रह किया।

मामले के इस चरण में ED की दलील को मानते हुए कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए सही आधार है।

यह मामला रांची के बड़गाई इलाके में स्थित 8.86 एकड़ ज़मीन से जुड़ी कथित मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। ED इस मामले की जांच प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत कर रही है।

सोरेन को इस मामले में 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया और वह 28 जून 2024 तक हिरासत में रहे, जब हाईकोर्ट ने उन्हें ज़मानत दी। ज़मानत देते समय हाईकोर्ट ने शुरुआती तौर पर यह टिप्पणी की थी कि ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि सोरेन दोषी हैं।

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