बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और कुत्तों के काटने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को नसबंदी अभियान को आक्रामक तरीके से लागू करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की आबादी में लगातार हो रही वृद्धि ही इस समस्या की प्रमुख वजह है और नसबंदी के जरिए इसके विस्तार को रोका जा सकता है।

चीफ जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की खंडपीठ ने यह निर्देश शुक्रवार को स्वतः संज्ञान से शुरू की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान वाले मामले के तहत सामने आया है, जिसमें सभी हाईकोर्ट को अपने-अपने राज्यों में आवारा कुत्तों की समस्या, खासकर कुत्तों के काटने की घटनाओं पर निगरानी रखने को कहा गया।

सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ओंकार चांदुरकर ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे अदालत के रिकॉर्ड पर रखे। पीठ ने उनसे पूछा कि रेबीज के मामलों और रेबीज रोधी दवाओं से संबंधित आंकड़े राज्य की वेबसाइट पर कितनी नियमितता से अपडेट किए जाते हैं। इस पर सरकार की ओर से बताया गया कि आंकड़े नियमित रूप से अपडेट किए जाते हैं।

खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट मिहिर देसाई को मामले में एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया। साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई नियमित रूप से करीब 15 दिन के अंतराल पर की जाएगी और प्रत्येक सुनवाई में राज्य सरकार को संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने होंगे।

चीफ जस्टिस घुगे ने कहा कि यदि अधिकारियों की ओर से पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के तहत कुत्तों की नसबंदी का कार्यक्रम सही तरीके से और बड़े स्तर पर लागू किया जाता है, तो आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि को रोका जा सकता है।

उन्होंने कहा,

“कुत्तों की बढ़ती आबादी को रोकना जरूरी है। यदि नसबंदी के जरिए उनकी संख्या में वृद्धि रुकती है, तो समस्या का एक बड़ा हिस्सा अपने आप हल हो जाएगा।”

खंडपीठ ने यह भी कहा कि अधिकारियों को कुत्तों की संख्या बढ़ने से रोकने पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए। अदालत के अनुसार, एक कुत्ते से चार से पांच पिल्ले पैदा होने की स्थिति में आबादी लगातार बढ़ती जाती है और इसके साथ नागरिकों के सामने आने वाली समस्याएं भी बढ़ती हैं।

मामले की अगली सुनवाई करीब 15 दिन बाद होगी।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तब तक नसबंदी कार्यक्रम और संबंधित आंकड़ों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने को कहा।


Tags: