मालेगांव ब्लास्ट मामला: हाईकोर्ट से चार आरोपियों को बड़ी राहत, आरोप तय करने का आदेश रद्द

Update: 2026-04-22 08:15 GMT

वर्ष 2006 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में चार आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को विशेष अदालत द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश रद्द किया।

हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चंदक की खंडपीठ ने यह फैसला आरोपियों द्वारा दायर अपीलों पर सुनाया।

अदालत ने माना कि आरोपियों ने प्रथम दृष्टया ऐसा मामला प्रस्तुत किया, जिसमें विशेष NIA अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करना उचित है। हालांकि फैसले की विस्तृत प्रति अभी उपलब्ध नहीं कराई गई।

यह मामला 8 सितंबर, 2006 को मालेगांव के हमीदिया मस्जिद के पास हुए भीषण विस्फोट से जुड़ा है। जुमे की नमाज़ के बाद हुए इस हमले में 37 लोगों की मौत हो गई, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

शुरुआत में महाराष्ट्र ATS ने इस मामले में नौ मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया था। ये सभी करीब पांच वर्षों तक जेल में रहे और वर्ष 2011 में उन्हें जमानत मिली। बाद में 2016 में विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी नौ आरोपियों को बरी कर दिया।

इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले की जांच संभाली और स्वामी असीमानंद के कथित इकबालिया बयान के आधार पर चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। असीमानंद ने कथित रूप से बयान दिया कि कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने मस्जिद के पास बम लगाया।

इन चारों आरोपियों को वर्ष 2019 में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। अब ताजा फैसले में हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश ही रद्द कर दिया, जिससे उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है।

इस फैसले से एक बार फिर इस बहुचर्चित मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं, जबकि पीड़ित परिवारों को अब भी अंतिम न्याय का इंतजार है।

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