पोंडा उपचुनाव पर रोक: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- एक वर्ष से कम शेष कार्यकाल होने पर चुनाव नहीं

Update: 2026-04-11 07:12 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा के पोंडा विधानसभा क्षेत्र के प्रस्तावित उपचुनाव रद्द करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के बाद निर्वाचित प्रतिनिधि के पास एक वर्ष से कम कार्यकाल बचता है तो ऐसा उपचुनाव नहीं कराया जा सकता।

यह मामला भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा 16 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना को चुनौती देने से जुड़ा था, जिसमें पोंडा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की गई।

जस्टिस वाल्मीकि मेनेज़ेस और जस्टिस अमित एस. जामसांडेकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 151-ए की व्याख्या की। अदालत ने स्पष्ट किया कि शेष कार्यकाल की गणना उपचुनाव के परिणाम घोषित होने की तारीख से की जानी चाहिए।

मामले के अनुसार पोंडा सीट 15 अक्टूबर 2025 को विधायक के निधन के बाद खाली हुई है। निर्वाचन आयोग ने छह महीने के भीतर चुनाव कराने के नियम के तहत 9 अप्रैल 2026 को मतदान और 4 मई 2026 को परिणाम घोषित करने की तारीख तय की थी। जबकि विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च 2027 को समाप्त होना है।

अदालत ने पाया कि यदि 4 मई 2026 से गणना की जाए तो निर्वाचित विधायक के पास एक वर्ष से कम समय बचेगा। ऐसे में कानून के अनुसार उपचुनाव पर रोक लागू होती है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पहले दिए गए निर्णय (संदीप सरोडे मामला) में भी यही व्याख्या की गई और वही इस मामले में भी लागू होगी। अदालत ने निर्वाचन आयोग की इस दलील को खारिज किया कि इस मुद्दे को बड़ी पीठ को भेजा जाए।

फैसले में कहा गया,

“जब शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम हो तो उपचुनाव कराने पर विधिक रोक लागू होती है।”

अंततः हाईकोर्ट ने ECI की अधिसूचना को कानून के विरुद्ध बताते हुए रद्द किया और स्पष्ट किया कि पोंडा सीट पर उपचुनाव नहीं कराया जा सकता।

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