सिर्फ FIR के आधार पर पायलट का लाइसेंस निलंबित नहीं कर सकता DGCA, कारण बताओ नोटिस जरूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट

Update: 2026-06-17 07:10 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल FIR दर्ज होने या फर्जी दस्तावेजों के आरोप सामने आने के आधार पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) किसी पायलट का लाइसेंस निलंबित नहीं कर सकता। ऐसा कदम उठाने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस देना और सुनवाई का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है।

जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की खंडपीठ एक पायलट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 12 मार्च 2011 के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके जरिए DGCA ने उसका एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस निलंबित किया था।

DGCA ने यह कार्रवाई इस आरोप के आधार पर की थी कि पायलट ने कथित रूप से फर्जी परीक्षा रिकॉर्ड के सहारे लाइसेंस प्राप्त किया। इस मामले में फर्जी पायलट लाइसेंस से जुड़े व्यापक जांच प्रकरण के तहत FIR भी दर्ज की गई।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि केवल FIR दर्ज होने से लाइसेंस निलंबित या रद्द नहीं किया जा सकता। नियमों के तहत ऐसे परिणाम तभी सामने आ सकते हैं, जब संबंधित व्यक्ति दोषसिद्ध हो जाए।

वहीं DGCA ने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि पायलट ने कथित रूप से फर्जी परीक्षा परिणाम प्रस्तुत कर लाइसेंस हासिल किया और सार्वजनिक हित में उसका लाइसेंस निलंबित करना आवश्यक है।

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को लाइसेंस रखने या प्राप्त करने के अधिकार से वंचित करने से पहले लाइसेंसिंग प्राधिकरण को उसे सुनवाई का अवसर देना और लिखित रूप से कारण दर्ज करना जरूरी है। अदालत ने पाया कि इस मामले में इन सभी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया।

अदालत ने गौर किया कि न तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, न व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही यह स्पष्ट किया गया कि कौन-सा दस्तावेज फर्जी था। इतना ही नहीं, निलंबन आदेश में इसकी अवधि का भी उल्लेख नहीं किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा,

“लाइसेंस निलंबित करने जैसा कठोर कदम उठाने से पहले याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। इससे उसे नुकसान पहुंचा, क्योंकि वह अपनी बात सामने नहीं रख सका।”

DGCA द्वारा विमान नियम, 1937 के नियम 19 का हवाला देने को भी अदालत ने खारिज किया। पीठ ने कहा कि इस प्रावधान की गलत व्याख्या की गई। नियम 19 मुख्य रूप से उन परिस्थितियों से संबंधित है, जहां नियमों के उल्लंघन में दोषसिद्धि हुई हो या विमान के प्रमाणीकरण एवं उड़ान योग्यता से जुड़े मुद्दे हों।

अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि याचिकाकर्ता किसी भी मामले में दोषसिद्ध नहीं हुआ, इसलिए DGCA सार्वजनिक हित का हवाला देकर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और आवश्यक प्रक्रियाओं को दरकिनार नहीं कर सकता।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने माना कि निलंबन आदेश संबंधित नियमों DGCA की प्रक्रियाओं और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए पारित किया गया। इसलिए अदालत ने DGCA का आदेश रद्द किया।

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