अनिश्चितकाल तक रोक नहीं लगा सकते: हाईकोर्ट ने इंग्लैंड निवासी डॉक्टर से मांगा जांच में सहयोग का भरोसा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में यूके में कार्यरत डॉक्टर डॉ. संग्राम पाटिल को राहत देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।
जस्टिस अश्विन भोबे ने सुनवाई के दौरान डॉक्टर पाटिल को निर्देश दिया कि वह अदालत में लिखित आश्वासन (अंडरटेकिंग) दाखिल करें जिसमें यह स्पष्ट हो कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर भारत वापस आएंगे।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी को भी अपनी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करनी होगी।
जज ने टिप्पणी की,
“आप किसी व्यक्ति को इस तरह रोके नहीं रख सकते जांच पूरी करनी होगी।”
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल ने अदालत से आग्रह किया कि लुकआउट सर्कुलर (NOC) हटाने की मांग पर कम से कम तीन महीने तक विचार न किया जाए, क्योंकि जांच अभी जारी है।
इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि केवल जांच लंबित होने के आधार पर किसी को अनिश्चितकाल तक देश छोड़ने से नहीं रोका जा सकता।
डॉ. पाटिल की ओर से सीनियर वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि उनका मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करेगा और बुलाए जाने पर भारत लौटेगा। उन्होंने यह भी बताया कि पाटिल ने अपने पोस्ट को लेकर खेद व्यक्त किया।
वकील ने यह भी कहा कि पाटिल यूके की स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत हैं और लंबे समय तक भारत में रुकने से उनकी नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही उनका परिवार भी विदेश में है।
अदालत ने फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 5 मई को तय की है जहां दाखिल किए जाने वाले आश्वासन के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।