1993 बम धमाका मामला: अबू सलेम को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज की

Update: 2026-04-15 07:34 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1993 मुंबई बम धमाका मामले के दोषी अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज की। सलेम ने दावा किया था कि वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है और भारत-पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के अनुसार उसे रिहा किया जाना चाहिए।

जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ ने ओपन कोर्ट में आदेश सुनाते हुए कहा कि इस समय रिहाई पर कोई अंतिम टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।

अदालत ने कहा,

“सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार रिहाई और रिमिशन की गणना रिहाई से एक माह पहले की जानी है, इसलिए इस स्तर पर कुछ कहना उचित नहीं है।”

सलेम ने अपनी याचिका में कहा था कि 2005 में भारत लाए जाने के बाद से लेकर अब तक, रिमिशन सहित उसने 25 साल की सजा पूरी कर ली है। उसने यह भी तर्क दिया कि भारत और पुर्तगाल के बीच हुए समझौते में स्पष्ट था कि उसकी सजा 25 वर्ष से अधिक नहीं होगी।

हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि 31 मार्च 2025 तक सलेम ने केवल लगभग 19 वर्ष 5 महीने की सजा ही पूरी की। सरकार ने सलेम की गणना को नियमों के विपरीत और निराधार बताया।

सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में यह भी कहा गया कि सलेम का आपराधिक इतिहास गंभीर है और उसकी रिहाई का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। साथ ही यह भी बताया गया कि उसे 50 वर्ष श्रेणी में रखा गया, जिसके अनुसार उसकी संभावित रिहाई की तारीख 31 जनवरी, 2046 हो सकती है।

गौरतलब है कि 2002 में भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया कि सलेम को न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही उसकी सजा 25 वर्ष से अधिक होगी जिसके आधार पर उसका प्रत्यर्पण हुआ।

हाईकोर्ट ने फिलहाल सलेम की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि रिहाई का प्रश्न उचित समय पर कानून के अनुसार ही तय किया जाएगा।

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