सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में अमित शाह को मिली राहत बरकरार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Update: 2026-05-08 11:53 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मिली राहत को चुनौती देने वाली अंतरिम याचिका खारिज की।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका संभवतः किसी “राजनीतिक विरोधी” के इशारे पर दायर की गई हो सकती है।

चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने 22 पुलिसकर्मियों को बरी किए जाने के फैसले को भी बरकरार रखा।

यह मामला सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ से जुड़ा है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा,

“यह कहने में हमें कोई संकोच नहीं है कि अंतरिम आवेदन संख्या 1172/2026 किसी छिपे उद्देश्य से और आरोपी संख्या-16 अमित शाह के किसी राजनीतिक विरोधी के कहने पर दायर किया गया प्रतीत होता है।”

मामले में मनियार कल्पेश कुमार नामक व्यक्ति ने अंतरिम आवेदन दाखिल कर 30 दिसंबर 2014 के विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अमित शाह को मामले से डिस्चार्ज कर दिया गया।

हालांकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने याचिका का विरोध किया।

उन्होंने अदालत को बताया कि सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख पहले ही अमित शाह को मिली राहत को चुनौती दे चुके हैं, जिसे हाईकोर्ट ने 23 नवंबर 2015 को खारिज कर दिया था।

इसके अलावा, नई दिल्ली निवासी हर्ष मंदर ने भी अमित शाह को मिली राहत के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसे 11 मार्च 2016 को खारिज किया गया।

खंडपीठ ने कहा कि इन तथ्यों को याचिकाकर्ता ने छिपाया। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि मुंबई के गोरेगांव निवासी और व्यवसाय से जुड़े याचिकाकर्ता को इस मामले की जानकारी कैसे मिली और वह लगभग दो दशक बाद अचानक क्यों सामने आए।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता न तो मामले में गवाह है और न ही उसने यह स्पष्ट किया कि लंबित आपराधिक अपीलों से उसका क्या संबंध है।

इन्हीं टिप्पणियों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम याचिका खारिज की।

Tags:    

Similar News