'धुरंधर' की स्क्रिप्ट को लेकर संतोष कुमार और आदित्य धर आमने-सामने: हाईकोर्ट ने मानहानिकारक टिप्पणी करने पर लगाई रोक

Update: 2026-04-08 14:57 GMT

हाल ही में रिलीज़ हुई बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर' के डायरेक्टर आदित्य धर को थोड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को फिल्ममेकर संतोष कुमार को फिल्म के बारे में कोई भी ऐसी टिप्पणी करने से रोक दिया, जो मानहानिकारक हो सकती है।

सिंगल-जज जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने सीनियर वकील डॉ. बीरेंद्र सराफ की संक्षिप्त दलीलें सुनीं, जो धर की तरफ से पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से गुज़ारिश की कि कम-से-कम अंतरिम आदेश जारी किया जाए, क्योंकि कुमार मीडिया में फिल्म और अपने क्लाइंट (धर) के खिलाफ लगातार मानहानिकारक बयान दे रहे थे।

दलीलों पर विचार करने के बाद जस्टिस डॉक्टर ने एकतरफा अंतरिम आदेश जारी करते हुए कुमार को अगले आदेश तक धर और उनकी फिल्म के खिलाफ टिप्पणी करने या पहले की गई टिप्पणियों को दोहराने से रोक दिया।

बेंच ने यह देखते हुए कि इस स्तर पर धर की तरफ से 'प्रथम दृष्टया' (prima facie) मामला बनता है, कुमार को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तारीख तय की।

धर के मुताबिक, फिल्म का दूसरा हिस्सा (धुरंधर: द रिवेंज) रिलीज़ होने के तुरंत बाद कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और साहित्यिक चोरी (Plagiarism) के कुछ आरोप लगाए। यह दलील दी गई कि कुमार ने धर पर उनकी स्क्रिप्ट 'कॉपी' करने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने दावा किया कि 2023 में स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में रजिस्टर करवाया था।

कुमार ने दावा किया कि उन्होंने अपनी ओरिजिनल स्क्रिप्ट, जिसका टाइटल 'डी साहब' था, कई बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ डिस्कस की थी। लेकिन इससे पहले कि कुछ आगे बढ़ पाता, धर ने उनकी स्क्रिप्ट कॉपी कर ली और विवादित फिल्म बना ली।

मुकदमे में कहा गया,

"वादी (Plaintiff) और उनकी टीम यह देखकर हैरान और परेशान रह गई कि उक्त प्रेस मीट के दौरान रिकॉर्ड किए गए या उससे निकाले गए कई वीडियो/वीडियो क्लिप अलग-अलग अकाउंट्स द्वारा स्वतंत्र रूप से अपलोड, दोबारा प्रकाशित और सर्कुलेट किए जा रहे थे। इन अकाउंट्स में वे अकाउंट्स भी शामिल हैं, जिनका ज़िक्र पहले किया गया। इनके अलावा भी कई अन्य अकाउंट्स शामिल हैं। इसके परिणामस्वरूप, मानहानिकारक बयान बड़े पैमाने पर और बार-बार फैलाए जा रहे हैं। उक्त प्रेस मीट के दौरान, प्रतिवादी नंबर 1 (Defendant No. 1) ने वादी के बारे में कई झूठे, अपमानजनक, बेहद मानहानिकारक, निंदात्मक और नीचा दिखाने वाले बयान दिए, जो पूरी दुनिया के सामने वादी की प्रतिष्ठा और साख को नुकसान पहुंचाते हैं और धूमिल करते हैं।"

सराफ़ ने कोर्ट को बताया कि कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उनके क्लाइंट धर ने कुमार को एक लीगल नोटिस भेजा और उनसे कहा कि वे साहित्यिक चोरी के कोई भी 'बिना सबूत वाले' आरोप न लगाएं। फ़िल्ममेकर ने आगे कहा कि ये आरोप बेबुनियाद और मानहानिकारक हैं और इनसे उनकी इज़्ज़त को 'नुकसान' पहुंचा है।

सीनियर वकील ने यह भी दलील दी कि चूंकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही कुमार ने लीगल कार्रवाई की चेतावनी दी थी, इसलिए वे कथित उल्लंघन के मामले में लीगल कार्रवाई शुरू करने के लिए आज़ाद थे।

सराफ़ ने कोर्ट से गुज़ारिश की,

"अगर कोई लीगल कार्रवाई शुरू की जाती है तो उसका सही जवाब दिया जाएगा। लेकिन तब तक उन्हें ऐसी भाषा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।"

लीगल नोटिस मिलने के बावजूद, कुमार ने उसका जवाब देना ठीक नहीं समझा और बुधवार को सुनवाई के लिए भी हाज़िर नहीं हुए।

दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस धर ने कुमार को आगे कोई भी मानहानिकारक टिप्पणी करने से रोककर अंतरिम राहत दी।

इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी।

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