ईरानी मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर की वापसी की मांग, बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका
बॉम्बे हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल कर ओमान तट पर ईरानी मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर को भारत लाने की मांग की गई है।
याचिका अमरतलाल गोकलाल सोलंकी द्वारा दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि उनके पुत्र दिक्षित सोलंकी जहाज “MKD Vyom” पर इंजन रूम में ऑइलर के रूप में कार्यरत थे। 1 मार्च को जहाज के ऑपरेशंस मैनेजर कैप्टन सैडलर रिबेरो ने परिवार को बताया कि मिसाइल हमले में उनके बेटे घायल हो गए और जहाज में छेद होने के कारण लापता हो गए।
याचिका में कहा गया है कि बाद में जानकारी दी गई कि अन्य सभी क्रू मेंबर्स को बचा लिया गया, लेकिन दिक्षित सोलंकी जहाज पर ही रह गए थे और बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
परिवार को 3 मार्च को बताया गया कि जहाज को सुरक्षा कारणों से खाली कर दिया गया है और उसे खोर फक्कन/फुजैरा की ओर ले जाया जा रहा है, जहां किसी को जहाज पर चढ़ने की अनुमति नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा पार्थिव शरीर को भारत लाने में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जो कि उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि मृतक के पार्थिव शरीर को प्राप्त कर अंतिम संस्कार करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत परिवार का अधिकार है। साथ ही, अधिकारियों पर यह कानूनी दायित्व है कि वे मर्चेंट नेवी एक्ट, 2025 के प्रावधानों के तहत जल्द से जल्द पार्थिव शरीर को गौतम अ अंखाड़करें।
इस मामले की सुनवाई चीफ़ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की पीठ द्वारा की जाएगी।