ग्राम पंचायतों पर अंतरिम व्यवस्था: सरपंच रहेंगे प्रशासक, पर बड़े फैसलों पर रोक- बॉम्बे हाईकोर्ट

Update: 2026-03-24 12:13 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ग्राम पंचायतों से जुड़े एक अहम मामले में अंतरिम राहत देते हुए कहा कि कार्यकाल पूरा कर चुके सरपंच फिलहाल प्रशासक के रूप में काम कर सकते हैं, लेकिन वे कोई नीतिगत या बड़े वित्तीय फैसले नहीं ले सकेंगे।

जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की खंडपीठ ने 18 मार्च को यह आदेश देते हुए राज्य सरकार के उस निर्णय पर रोक नहीं लगाई, जिसके तहत करीब 14,500 ग्राम पंचायतों में चुनाव होने तक मौजूदा या पूर्व सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया गया।

अदालत ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में सरपंचों को प्रशासक का कार्यभार संभालने की अनुमति दी जाती है लेकिन इससे उनके पक्ष में कोई अधिकार या लाभ उत्पन्न नहीं होगा।

हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे प्रशासक कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे और बड़े खर्चों से भी दूर रहेंगे। वे केवल दैनिक प्रशासनिक कार्य जैसे कर्मचारियों का वेतन, पानी-बिजली के बिल और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े खर्च ही कर सकेंगे।

विवाद

महाराष्ट्र सरकार ने 20 फरवरी, 2026 को एक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी कर करीब 14,500 ग्राम पंचायतों में चुनाव होने तक पूर्व सरपंचों को 6 महीने या चुनाव संपन्न होने तक प्रशासक नियुक्त करने का फैसला किया।

याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए चुनौती दी। उनका कहना है कि चुने हुए प्रतिनिधियों के स्थान पर इस तरह की नियुक्ति उचित नहीं है।

वहीं राज्य सरकार का तर्क है कि यदि सरपंच को कार्यभार संभालने से रोका गया तो पंचायतें बिना नेतृत्व के रह जाएंगी या फिर पूरी पंचायत को सामूहिक रूप से काम करना पड़ेगा, जो संविधान के अनुच्छेद 243E के विपरीत होगा।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 27 मार्च तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।

अदालत ने यह भी नोट किया कि औरंगाबाद और कोल्हापुर पीठों ने भी इसी तरह के अंतरिम आदेश दिए और सभी याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए जोड़ा जा सकता है।

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