लोकप्रिय टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी के सुसाइड केस में आरोपी बनाए जाने के लगभग एक दशक बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में उनके बॉयफ्रेंड और इवेंट प्लानर राहुल राज सिंह को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि 'बालिका वधू' फेम एक्ट्रेस ने राहुल द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने के कारण यह कठोर कदम उठाया।

सिंगल-जज जस्टिस शिवकुमार दिगे ने 30 सितंबर के अपने आदेश में - जिसे गुरुवार (8 अक्टूबर) को अपलोड किया गया - बनर्जी के माता-पिता के आरोपों का ज़िक्र किया। माता-पिता का आरोप था कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान सिंह उनकी बेटी को परेशान करते थे और लगातार उत्पीड़न से तंग आकर, उनकी बेटी ने 1 अप्रैल, 2016 को गोरेगांव (पश्चिम) में अपने किराए के फ्लैट में फांसी लगाकर आत्महत्या की।

हालांकि, जज ने कहा कि बनर्जी परिवार सिंह द्वारा अपनी बेटी को कथित तौर पर परेशान किए जाने के बारे में रिकॉर्ड पर कोई सबूत पेश नहीं कर पाया।

जज ने कहा,

"हालांकि यह आरोप लगाया गया कि आवेदक मृतका को परेशान कर रहा था, लेकिन इस संबंध में रिकॉर्ड पर कोई सबूत पेश नहीं किया गया। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आत्महत्या करने से पहले आवेदक और मृतका के बीच आखिरी कॉल हुई। उस कॉल के दौरान, आवेदक मृतका से विनती कर रहा था कि वह उसके आने तक कोई कठोर कदम न उठाए, लेकिन मृतका सुनने की स्थिति में नहीं थी। वह लगातार कह रही थी कि वह अपनी ज़िंदगी से तंग आ चुकी है। घटना के बाद आवेदक दूसरों के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा और मृतका की जान बचाने के लिए उसे अस्पताल ले गया। रिकॉर्ड से पता चलता है कि उक्त घटना के बाद सदमे के कारण आवेदक को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया।"

जज ने आगे बताया कि अपनी ज़िंदगी के दौरान, जब वह लगभग एक साल तक सिंह के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थीं, तब उन्होंने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई।

जस्टिस दिगे ने सिंह को बरी करते हुए कहा,

"रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से ऐसा कुछ भी पता नहीं चलता कि आवेदक ने मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया या प्रेरित किया हो। आवेदक के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।"

सिंह पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा और बॉम्बे हाईकोर्ट ने जुलाई 2016 में उन्हें अग्रिम ज़मानत दी। अप्रैल 2018 में बांगुर नगर पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद सिंह ने मामले से बरी होने की अर्ज़ी दायर की।

सिंह का दावा था कि जब बनर्जी ने यह कठोर कदम उठाया, तब वह शराब के नशे में थीं और काम न मिलने की वजह से डिप्रेशन में थीं। उन्होंने 'मारियानो एंटो ब्रूनो बनाम इंस्पेक्टर ऑफ़ पुलिस' मामले का हवाला देते हुए कहा कि उनकी तरफ से बनर्जी को आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उकसाया नहीं गया, इसलिए अपराध के ज़रूरी तत्व मौजूद नहीं है।

हालांकि, सेशंस कोर्ट ने 14 अगस्त 2023 को पारित आदेश में उन्हें बरी करने से इनकार किया। कोर्ट ने बनर्जी के दोस्तों और परिवार वालों के बयानों के रूप में 'मज़बूत' सबूतों का ज़िक्र किया, जिन्होंने दोनों के बीच 'हिंसक और अपमानजनक' रिश्ते के बारे में बताया था।

सिंह ने सेशंस कोर्ट के इस आदेश को जस्टिस डिगे के सामने चुनौती दी, जिन्होंने उस आदेश को रद्द कर दिया और उन्हें मामले से बरी किया।

Case Title : Rahul Harshvardhan Singh vs State of Maharashtra

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