राजस्थान हाईकोर्ट ने अमेरिका में रह रही रेप पीड़िता को समन भेजने के लिए भारत-अमेरिका संधि का सहारा लिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत और अमेरिका के बीच हुई 'म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी' (MLAT) और BNSS की धारा 110 का इस्तेमाल करते हुए रेप केस की उस शिकायतकर्ता महिला का पता लगाने और उसे नोटिस भेजने का निर्देश दिया, जो शिकायत दर्ज कराने के बाद अमेरिका चली गई थी।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 110 उन मामलों से जुड़ी है, जहां भारत के बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति तक कोर्ट के नोटिस या समन पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने संबंधित देश के साथ कोई आपसी समझौता (Reciprocal Arrangement) किया हो।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच रेप के आरोप वाली FIR को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में शिकायतकर्ता महिला को लगभग 2 सालों तक कोई नोटिस या समन नहीं मिल सका, और भारत में उसका पता भी नहीं चल पाया।
दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने और इस तथ्य पर विचार करने के बाद कि कई मौकों के बावजूद 2 सालों तक पीड़िता को नोटिस नहीं मिल पाया, कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में "मुख्य गवाह" (Star Witness) है और उसकी भागीदारी के बिना जांच को ठीक से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
"भारत और अमेरिका के बीच आपराधिक मामलों में 'आपसी कानूनी सहायता संधि' (MLAT) हुई, जिस पर 2001 में हस्ताक्षर किए गए थे और जो 2005 से लागू है। इस संधि के अनुच्छेद 1(2) में विशेष रूप से यह प्रावधान है कि किसी व्यक्ति से साक्ष्य (गवाही) लेने, दस्तावेज उपलब्ध कराने और व्यक्तियों का पता लगाने में सहायता दी जाएगी।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेश में रहने वाले व्यक्तियों को समन, नोटिस और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं भेजने के संबंध में 11.02.2009 को दिशानिर्देश (संख्या 25016/17/2007-लीगल सेल) जारी किए (जिन्हें 04.12.2019 के दिशानिर्देश संख्या F.NO25016/52/2019-LC के माध्यम से संशोधित किया गया)। निर्धारित प्रक्रिया के तहत गृह मंत्रालय का 'आंतरिक सुरक्षा प्रभाग' (Internal Security Division) MLAT अनुरोधों के लिए 'केंद्रीय प्राधिकरण' (Central Authority) के रूप में कार्य करता है। ऐसे अनुरोध प्राप्त होने पर, मंत्रालय उन्हें संबंधित भारतीय मिशनों/दूतावासों को भेजता है, जो आगे चलकर इन्हें MLAT में बताए गए राजनयिक माध्यमों (Diplomatic Channels) के जरिए संबंधित देश के केंद्रीय प्राधिकरण या वहां स्थित भारतीय मिशन/दूतावास को भेजते हैं।"
अदालत ने कहा कि MLAT दिशानिर्देशों के अनुसार, अमेरिका को 'हेग सर्विस कन्वेंशन' (Hague Service Convention) के अनुच्छेद 10(a) के तहत डाक के माध्यम से या राजनयिक/कांसुलर मिशनों के जरिए अनौपचारिक रूप से नोटिस/समन भेजने पर कोई आपत्ति नहीं है।
बता दें, अदालत ने BNSS की धारा 110 और भारत-अमेरिका के बीच हुई MLAT का हवाला देते हुए कहा कि विदेश में रहने वाले व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक माध्यमों से नोटिस/समन भेजना एक वैध तरीका है।
कोर्ट ने आगे कहा,
"यह देखते हुए कि शिकायतकर्ता (महिला) अमेरिका में रह रही है और उपलब्ध पते पर उसे नोटिस भेजने के बार-बार किए गए प्रयास असफल रहे हैं तथा आगे की कार्यवाही के लिए उसकी उपस्थिति आवश्यक है; इसलिए यह अदालत BNSS की धारा 110 के तहत उपलब्ध प्रक्रिया का उपयोग करना उचित समझती है। भारत-अमेरिका MLAT और संबंधित दिशानिर्देशों के साथ इसे पढ़ते हुए अदालत का मानना है कि उसके ठिकाने का पता लगाने और उसे नोटिस तामील कराने के लिए इस प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए।"
जांच अधिकारी के अनुसार, उसके रिश्तेदारों से मिली जानकारी से पता चला कि वह अमेरिका में रह रही थी, लेकिन उसका सटीक पता मालूम नहीं है।
अदालत ने बताया कि FIR दर्ज होने के बाद वह वापस पुलिस स्टेशन आई और FIR वापस लेने के लिए आवेदन दिया। उसने कहा कि उसने गुस्से में आकर FIR दर्ज कराई। इस आवेदन के आधार पर जांच अधिकारी (IO) ने 'नेगेटिव फाइनल रिपोर्ट' (मामला बंद करने की रिपोर्ट) दाखिल करने का प्रस्ताव रखा।
क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से पहले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उससे संपर्क किया ताकि FIR वापस लेने के आवेदन की पुष्टि की जा सके और उसमें लिखी बातों की जांच हो सके। तब उसने बताया कि उसने वह आवेदन दबाव में आकर दिया था, और वह अब याचिकाकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चाहती है। इसलिए, मामले को फिर से खोल दिया गया।
जांच अधिकारी ने बताया कि पीड़िता (शिकायतकर्ता महिला) के मौजूद न होने के कारण आवेदन के जमा किए जाने की पुष्टि नहीं हो सकी और जांच लंबित (पेंडिंग) रह गई।
इसके अनुसार, गृह मंत्रालय को एक अनुरोध भेजने का निर्देश दिया गया ताकि वे पीड़िता का पता लगाने और उसे समन (न्यायालय या पुलिस का बुलावा) तामील कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
Case Title : Chander Bhushan v State of Rajasthan & Anr