क्या प्रैक्टिस की जगह बदलने पर 'सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस' को फिर से जारी किया जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी बार काउंसिल से पूछा
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या किसी वकील के 'सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस' (CoP) को उसकी प्रैक्टिस की जगह में बदलाव को दर्शाने के लिए फिर से जारी किया जा सकता है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने पूछा कि क्या CoP को इस तरह फिर से जारी करना संभव है। अगर है तो क्या इसके लिए कोई समय-सीमा तय है?
बेंच ने यह स्पष्टीकरण तब मांगा, जब वह गिरधारी लाल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका 'अवध बार एसोसिएशन' के आगामी चुनावों से संबंधित है।
हाईकोर्ट ने इस बात पर भी स्पष्टीकरण मांगा कि क्या उस बार एसोसिएशन को बदला जा सकता है, जहां कोई वकील अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करता है (जैसा कि CoP में दर्ज है)। साथ ही यह भी पूछा कि अगर ऐसा बदलाव संभव है तो यह कितने समय के भीतर किया जा सकता है?
कोर्ट ने बार काउंसिल के वकील को निर्देश दिया कि वे इस संबंध में जरूरी जानकारी लें और कोर्ट को बताएं कि इसके लिए क्या नियम और समय-सीमा लागू होती है।
इस बीच बेंच ने बार काउंसिल के वकील को निर्देश दिया कि वे उन मतदाताओं का विवरण उपलब्ध कराएं, जिनके नाम 'अवध बार एसोसिएशन' के आगामी चुनावों के लिए रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा फाइनल की गई मतदाता सूची में शामिल हैं। यह विवरण काउंसिल की वेबसाइट पर भी मौजूद होना चाहिए।
आदेश में कहा गया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने आगामी चुनावों में वोट देने के योग्य 5,108 सदस्यों की सूची फाइनल की।
इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर को निर्देश दिया कि वे बार काउंसिल के वकील को उन सभी 5,108 योग्य मतदाताओं के नामों वाली एक सूची (कॉपी) उपलब्ध कराएं।
बेंच ने आगे यह भी निर्देश दिया कि पहले जारी किए गए। बाद में बदले गए या फिर से जारी किए गए CoP का विवरण भी अगली सुनवाई की तारीख पर पेश किया जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।