वकालतनामे पर हस्ताक्षर विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक जांच के दिए आदेश

Update: 2026-07-17 08:26 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर स्थित नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज के प्रबंधन से जुड़े मामले में विवादित वकालतनामे पर किए गए हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच कराने का आदेश दिया है। अदालत के समक्ष एक पक्षकार ने दावा किया कि उसने न तो वकालतनामे पर हस्ताक्षर किए और न ही संबंधित अधिवक्ता को अपनी ओर से पेश होने के लिए अधिकृत किया था।

जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ के समक्ष यह विवाद पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता शिव शंकर सिंह ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिवक्ता को कभी नियुक्त नहीं किया और आखिरी बार जनवरी 2026 में किसी अन्य मामले के सिलसिले में उनके चैंबर गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पहले शिव शंकर सिंह और उनके रिश्तेदार भोला सिंह यादव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने और अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। अपने हलफनामे में शिव शंकर सिंह ने आरोप लगाया कि भोला सिंह यादव के आचरण पर संदेह होने के बाद उन्होंने उनसे संबंध समाप्त कर लिए थे।

हालांकि, अदालत ने पाया कि दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास है। वहीं, भोला सिंह यादव ने अपने हलफनामे में दावा किया कि अप्रैल 2026 में वह और शिव शंकर सिंह साथ में अधिवक्ता के घर गए थे और उनके क्लर्क को कैविएट दाखिल करने के लिए पैसे भी दिए थे।

अदालत ने कहा कि दोनों में से किसी का भी बयान सही हो, लेकिन कोई भी यह नहीं कह रहा कि विवादित वकालतनामा अधिवक्ता को किसने सौंपा। अदालत ने यह भी नोट किया कि अधिवक्ता ने स्वीकार किया है कि वकालतनामे पर हस्ताक्षर का सत्यापन उन्होंने स्वयं नहीं, बल्कि उनके क्लर्क ने किया था। क्लर्क की भूमिका की जांच बाद में की जाएगी।

इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने हस्ताक्षर विशेषज्ञ को निर्देश दिया कि वह वकालतनामे और कैविएट आवेदन पर मौजूद हस्ताक्षरों की तुलना करे। साथ ही, विवादित वकालतनामे पर मौजूद हस्ताक्षरों का शिव शंकर सिंह के एक अन्य वाद में स्वीकार किए गए हस्ताक्षरों से मिलान कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

अदालत ने संबंधित दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई 2026 को निर्धारित की है।

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