इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की एक ग्राम पंचायत की मतदाता सूची से 32 लोगों के नाम कथित रूप से गलत तरीके से हटाए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है।

जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ संतोष कुमार और 31 अन्य लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान उनके नाम अवैध रूप से हटा दिए गए।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि ग्राम पंचायत रूपनगर, विकासखंड तुलसीपुर, जिला बलरामपुर की वर्ष 2025 की अंतिम पंचायत मतदाता सूची में उनके नाम शामिल नहीं किए गए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गांव में निवास नहीं करने वाले 48 लोगों के नाम मतदाता सूची में गलत तरीके से जोड़ दिए गए। मामले में प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 6 से 53 तक को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 1 और 2 को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि वे स्पष्ट करें कि याचिकाकर्ताओं के नाम किस आधार पर हटाए गए और प्रतिवादी संख्या 6 से 53 तक के लोगों के नाम मतदाता सूची में किस आधार पर जोड़े गए।

मामले को 15 दिसंबर को शुरुआती दस मामलों में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

अमेठी में भी 138 लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब होने का मामला

गौरतलब है कि हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमेठी के 138 लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची से गायब होने के मामले में भी उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था।

जस्टिस जसप्रीत सिंह की एकल पीठ अमेठी जिले के गोपालपुर गांव, ग्राम पंचायत महमूदपुर बेनीपुर, विकासखंड और तहसील अमेठी के 138 प्रभावित निवासियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनके नाम पिछले लगभग दस वर्षों से मतदाता सूची में शामिल थे। इसके अलावा, प्रारूप मतदाता सूची में भी उनके नाम मौजूद थे। हालांकि, अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर उनके नाम हटा दिए गए।

9 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता से पूछा था कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने के लिए किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

कोर्ट ने सवाल किया कि जब संबंधित लोगों के नाम पिछली मतदाता सूची के साथ-साथ प्रारूप मतदाता सूची में भी मौजूद थे, तो अंतिम सूची प्रकाशित करते समय बिना उन्हें नोटिस दिए उनके नाम कैसे हटा दिए गए?

राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच करने और आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रामीणों का आरोप था कि अंतिम मतदाता सूची से लगभग 200 जीवित लोगों के नाम गायब हैं, जबकि करीब 50 मृत व्यक्तियों के नाम अब भी सूची में दर्ज हैं।

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा सर्वे किए जाने के बावजूद उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

वहीं, अपर जिलाधिकारी ज्योति सिंह ने कहा था कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और अभी तक कोर्ट का कोई अंतिम आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलने के बाद उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब बलरामपुर के मामले में भी हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने का आधार स्पष्ट करने को कहा है।

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