वकील अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने के लिए PIL याचिकाकर्ता नहीं बन सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि कोई भी वकील, जिसके पास उसके क्लाइंट्स अपनी शिकायतों के निवारण के लिए आते हैं, उसे खुद याचिकाकर्ता बनकर अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने वाली जनहित याचिका (PIL) दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यह देखते हुए कि ऐसा आचरण पेशेवर कदाचार माना जा सकता है, चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने एक वकील द्वारा दायर की गई PIL याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की। इस याचिका में वकील ने प्रतिवादियों को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वे पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के आधार पर उद्योगों को प्राकृतिक गैस कनेक्शन उपलब्ध कराएं।
याचिका में अपनी पहचान और साख बताते हुए याचिकाकर्ता ने अन्य बातों के साथ-साथ यह भी कहा था कि वह जिला फिरोजाबाद में वकालत करने वाला वकील है, कुछ उद्योगों का कानूनी सलाहकार है। साथ ही वह औद्योगिक प्राधिकरणों के समक्ष उद्योगों से जुड़े मामलों को देखता है।
उसके इस खुलासे को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने टिप्पणी की कि ऐसे वकील द्वारा PIL याचिका दायर करना—जो खुद कुछ उद्योगों का कानूनी सलाहकार है—इस याचिका को 'जनहित' के दायरे से बाहर कर देता है।
अतः, यह देखते हुए कि ऐसा आचरण पेशेवर कदाचार माना जा सकता है, खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को भविष्य में इस तरह के किसी भी प्रयास में शामिल न होने की चेतावनी देते हुए, PIL याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की।
Case title - Surendra Kumar Sharma vs. Union of India and 4 others 2026 LiveLaw (AB) 219