दिल्ली की एएपी सरकार को हाईकोर्ट का झटका - न्यूनतम वेतन में संशोधन की अधिसूचना को निरस्त किया [निर्णय पढ़ें]

Update: 2018-08-05 10:49 GMT

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार को तगड़ा झटका देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के केजरीवाल सरकार फैसले को रद्द कर दिया है। हाइकोर्ट ने मार्च 2017 के सभी श्रेणी के मजदूरों की न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने वाली अधिसूचना को संविधान-विरुद्ध बताया है। कोर्ट ने कहा कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल और सी हरि शंकर की खंडपीठ ने न्यूनतम मजदूरी पर बनाये गए परामर्श पैनल की अधिसूचना को प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध और बिना पर्याप्त दस्तावेज़ के बताते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में कहीं से बुद्धि का प्रयोग नहीं किया गया और ये प्रावधान  न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 की धारा 5(1) और 9 के खिलाफ बताया।


मार्च 2017 में दिल्ली सरकार ने अधिसूचना जारी की थी जिसके मुताबिक दिल्ली में अकुशल मजदूर को 13,500, अर्ध कुशल मजदूर को 14,698 और कुशल मजदूर को 16,198 रुपये प्रति माह न्यूनतम मजदूरी मिलनी चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट में इस अधिसूचना के खिलाफ यह याचिका नियोक्ताओं ने दायर किये थे जिसमें व्यापार संघ, पेट्रोल डीलर्स और रेस्तरां मालिक शामिल हैं। इन लोगों ने दो अधिसूचनाओं के खिलाफ याचिका डाली थी जिसमें एक तो सितंबर 2016 में जारी की गई थी और दूसरी मार्च 2017 में।

कोर्ट ने कहा कि वेतन में सुधार की जरूरत थी पर जो किया गया वह बहुत ही जल्दबाजी में किया गया और ऐसा करते हुए वैधानिक सीमाओं का ख़याल नहीं रखा गया।


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