हाईकोर्ट ने एससी की अरेस्ट गाइडलाइन तोड़ने और आरोपी को रिहा करने में 20+ घंटे की देरी पर की यूपी पुलिस की खिंचाई

Update: 2026-03-01 14:42 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यूपी पुलिस अधिकारियों की खिंचाई करते हुए कहा कि उनके पास "देश के कानून की कोई इज्ज़त नहीं है", क्योंकि उन्होंने एक ऐसे आदमी को गिरफ्तार किया, जिस पर सात साल से कम की सज़ा वाले जुर्म के लिए केस दर्ज है, जो सुप्रीम कोर्ट की सतेंद्र कुमार अंतिल गाइडलाइन्स 2026 का सीधा उल्लंघन है।

कोर्ट ने राज्य के पुलिस अधिकारियों की भी खिंचाई की, क्योंकि उन्होंने हाईकोर्ट के (12 फरवरी को) साफ ऑर्डर के बावजूद कि उसे 'तुरंत' रिहा किया जाए, याचिकाकर्ता की रिहाई में लगभग 20 घंटे की देरी की।

बता दें, जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच सचिन आर्य और एक अन्य द्वारा फाइल की गई हेबियस कॉर्पस रिट पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता सचिन आर्य को प्रयागराज के धूमनगंज पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 3 और धारा 25(1B)(a) के तहत कथित तौर पर अपराध करने के लिए गिरफ्तार किया था।

12 फरवरी को बेंच ने कहा कि कथित अपराधों के लिए कम से कम सज़ा दो साल थी, जिसे बढ़ाकर पांच साल किया जा सकता है। इसलिए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी को पहली नज़र में गैर-कानूनी बताया।

बेंच ने साफ कहा कि पुलिस की कार्रवाई सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन एंड अदर 2026 लाइवलॉ (SC) 114 के हालिया मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।

उल्लेखनीय है, सतेंद्र अंतिल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि ऐसे अपराधों के लिए कोई गिरफ्तारी नहीं की जा सकती, जिनकी सज़ा 7 साल से कम है, जब तक कि BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस देने की ज़रूरी शर्त का पालन न किया जाए।

अब हिरासत के गैर-कानूनी होने को देखते हुए कोर्ट ने उसी दिन ऑर्डर की सर्टिफाइड कॉपी मिलने का इंतज़ार किए बिना पिटीशनर को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।

हालांकि, 17 फरवरी को बेंच को बताया गया कि हालांकि रिहाई का ऑर्डर 12 फरवरी को सुबह करीब 11:00 बजे पास किया गया, लेकिन याचिकाकर्ता को अगले दिन सुबह करीब 8:40 बजे रिहा किया गया।

याचिकाकर्ता को रिहा करने में 20+ घंटे से ज़्यादा की देरी पर दुख जताते हुए कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों, SHO और सब-इंस्पेक्टर इंचार्ज का व्यवहार सुप्रीम कोर्ट की अवमानना ​​जैसा था।

बेंच ने उनकी बिना शर्त माफी को भी खारिज किया और प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को दोषी अधिकारियों के खिलाफ सही कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा, 25 फरवरी को जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस हरवीर सिंह की बेंच ने कमिश्नर का पर्सनल एफिडेविट रिकॉर्ड पर लिया।

बेंच ने कहा कि हेबियस कॉर्पस पिटीशन में मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता, लेकिन उसने याचिकाकर्ता को कानून के तहत मौजूद कोई भी दूसरा कानूनी उपाय इस्तेमाल करने का मौका दिया।

चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही जेल से रिहा हो चुका था, इसलिए हाईकोर्ट ने हेबियस कॉर्पस पिटीशन का निपटारा किया। हालांकि, उसने पुलिस कमिश्नर से कहा कि वे गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ डिसिप्लिनरी फैसले को उनके सही अंजाम तक ले जाएं।

Case title - Sachin Arya @ Sachin Bhartiya And Another vs. State Of Uttar Pradesh And 4 Others 2026 LiveLaw (AB) 97

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