सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
Shahadat
18 July 2026 10:15 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (13 जुलाई, 2026 से 17 जुलाई, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
Art. 226 | हाईकोर्ट 'सर्टिओरारी' अधिकार क्षेत्र के तहत सबूतों का दोबारा मूल्यांकन या तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों में दखल नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट 'सर्टिओरारी' की रिट जारी करके उन सबूतों की समीक्षा या दोबारा जांच नहीं कर सकता, जिनके आधार पर निचली अदालतों ने किसी मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने दोहराया कि ऐसा अधिकार क्षेत्र केवल अदालतों या ट्रिब्यूनल द्वारा अधिकार क्षेत्र से जुड़ी गलतियों को सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि सबूतों का दोबारा मूल्यांकन करने या अपील की अदालत की तरह काम करने के लिए।
ऐसा कहते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जो उसने अपने रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए सुनाया था। इस फैसले में हाईकोर्ट ने पहली अपीलीय अदालत (First Appellate Court) के उन निष्कर्षों को खारिज किया, जो रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों पर उचित विचार करने के बाद निकाले गए।
Cause Title: BASAMMA & ANR. Versus GOPARAPPA AND ORS.
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टाउन पंचायत के नॉमिनेटेड सदस्य लेजिस्लेटिव काउंसिल चुनाव में वोट नहीं डाल सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टाउन पंचायतों के नॉमिनेटेड सदस्य कर्नाटक लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए लोकल अथॉरिटीज़ निर्वाचन क्षेत्रों से होने वाले चुनावों में वोट नहीं डाल सकते। कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट में उन्हें शामिल करना संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती देने वाली कई अपीलों को खारिज किया। हाईकोर्ट ने कहा था कि नॉमिनेटेड सदस्य चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते और वोटों की दोबारा गिनती में उनके वोटों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
Case : Pranesh M.K. v. A.V. Gayathri & Ors.
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SIR | वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब नागरिकता जाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फिर से कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के बाद वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब अपने आप नागरिकता का दर्जा खोना नहीं है। कोर्ट ने बताया कि उसने बिहार SIR फैसले में यह साफ कर दिया था कि नागरिकता तय करने का आखिरी अधिकार भारत के चुनाव आयोग (ECI) के पास नहीं है, और वोटर लिस्ट से नाम हटने से ही किसी की नागरिकता नहीं छीनी जा सकती।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच प्रसेनजीत बोस की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में SIR से बाहर किए गए लोगों की अपील सुनने के लिए बने अपीलीय ट्रिब्यूनल में सुनवाई की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई राहतें मांगी गईं।
Case Title: PRASENJIT BOSE v. ELECTION COMMISSION OF INDIA AND ORS. W.P.(C) No. 819/2026
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क्या वसीयत के प्रोबेट के लिए आवेदन वसीयतकर्ता की मौत के 3 साल के अंदर न करने पर समय-सीमा खत्म हो जाती है? सुप्रीम कोर्ट ने दिया जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत के प्रोबेट के लिए आवेदन वसीयतकर्ता की मौत के तीन साल के अंदर ही करना ज़रूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि प्रोबेट के लिए आवेदन करने का अधिकार तब मिलता है जब ऐसा करना ज़रूरी हो जाता है, यानी जब वसीयत से बनी स्थिति के खिलाफ कोई कदम उठाया जाता है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा, "इसलिए आवेदन करने का अधिकार उस तारीख से मिलता है, जब आवेदन करना ज़रूरी हो जाता है। ज़ाहिर है, यह वसीयतकर्ता की मौत के तीन साल के अंदर होना ज़रूरी नहीं है।"
Cause title: SANJAY SHARMA @ SANJAY BHARDWAJ VERSUS KRISHNADHAN KHAWARE AND ORS.
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मूल विक्रेता की सहमति के बिना रेक्टिफिकेशन डीड से संपत्ति नहीं बदली जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि रेक्टिफिकेशन डीड (Rectification Deed) का इस्तेमाल किसी बिक्री विलेख (Sale Deed) में केवल त्रुटि सुधारने के लिए किया जा सकता है, न कि संपत्ति की पहचान ही बदलने के लिए। अदालत ने कहा कि यदि मूल विक्रेता (Original Transferor) इसकी प्रक्रिया में शामिल नहीं है, तो रेक्टिफिकेशन डीड के जरिए दूसरी संपत्ति का स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने यह भी कहा कि अदालतें ऐसे आधार पर फैसला नहीं दे सकतीं, जो पक्षकारों ने कभी अपने तर्कों में उठाए ही न हों।
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एविडेंस एक्ट की धारा 68- रजिस्टर्ड सेल डीड के लिए गवाहों के सर्टिफिकेशन (अटेस्टेशन) के सबूत की ज़रूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को फैसला सुनाया कि इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 68 का प्रोविज़ो (शर्त) रजिस्टर्ड सेल डीड पर लागू नहीं होता है, क्योंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए गवाहों से सर्टिफिकेशन ज़रूरी नहीं है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें सेल डीड ट्रांज़ैक्शन पर धारा 68 के प्रोविज़ो को गलत तरीके से लागू किया गया।
Cause Title: R. VERONICA & ANR. VERSUS RUDRAYANI DEVAKI(D) THROUGH LRS. S. SATHA KUMAR & ORS.
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Hindu Succession Act | धारा 22 के तहत क्लास-I उत्तराधिकारियों का प्राथमिकता वाला अधिकार कृषि भूमि पर भी लागू होती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को फैसला सुनाया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 22, जो क्लास-I उत्तराधिकारियों को किसी अन्य सह-उत्तराधिकारी द्वारा ट्रांसफर की जाने वाली संपत्ति को खरीदने का प्राथमिकता वाला अधिकार देता है, कृषि भूमि पर भी समान रूप से लागू होती है।
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 22 के कृषि भूमि पर लागू होने को चुनौती देने वाली अपील खारिज करते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने 'बाबू राम बनाम संतोख सिंह' (2019) 14 SCC 162 मामले का हवाला देते हुए कहा कि धारा 22 के तहत प्राथमिकता वाला अधिकार कृषि भूमि पर भी लागू होती है।
Cause Title: MAHINDER & ORS. VERSUS PURAN SINGH
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MMDR Act | लीज़ डीड में रॉयल्टी में बदलाव के बारे में कुछ न कहे जाने के बावजूद सरकार रॉयल्टी की दर बदल सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि माइनिंग लीज़ डीड में खनिजों की माइनिंग पर रॉयल्टी में बदलाव के बारे में कुछ न कहे जाने का मतलब यह नहीं है कि सरकार 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957' के तहत समय-समय पर रॉयल्टी की दर बदलने की अपनी शक्ति खो देगी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा, "माइनिंग लीज़ एक कानूनी ग्रांट है, जबकि रॉयल्टी कानूनी लेवी (शुल्क) है। समय-समय पर रॉयल्टी में बदलाव करने की शक्ति MMDR Act की धारा 15 और उसके तहत बने नियमों [खासकर 1964 के नियमों के नियम 21(1)(i)(a) के प्रावधान] से मिलती है। लीज़ डीड में रॉयल्टी में बदलाव के बारे में कुछ न कहे जाने से राज्य की कानूनी शक्ति खत्म नहीं हो सकती और न ही यह MMDR Act की धारा 15 और उसके तहत बने नियमों के तहत शक्ति के इस्तेमाल में कोई रुकावट बन सकती है। इसलिए लीज़ लेने वाला पूरी लीज़ अवधि के लिए एक ही रॉयल्टी दर पर अपना अधिकार नहीं जता सकता।"
Cause Title: THE STATE OF HARYANA & ORS. VERSUS M/S FARIDABAD GURGAON MINERALS & ANR. (with connected case)
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सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर ब्याज न देने वाला कॉन्ट्रैक्ट पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट की किसी शर्त को सिर्फ़ इसलिए कानून और पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसमें सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर ब्याज देने की बात नहीं कही गई।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट की एक शर्त को पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ बताया गया, क्योंकि उसमें सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर ब्याज देने का प्रावधान नहीं था।
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तमिलनाडु में जारी रहेगी गो-हत्या: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें बकरीद या किसी भी अन्य दिन तमिलनाडु राज्य में कहीं भी गाय या बछड़े की हत्या पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने तमिलनाडु राज्य द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। राज्य ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें राज्य में गायों और बछड़ों की हत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई।
Case : The Secretary to the Government v. K Surya alias K Surya Prasanth | Diary No.36054/2026


