BREAKING| तमिलनाडु में जारी रहेगी गो-हत्या: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

Shahadat

13 July 2026 1:44 PM IST

  • BREAKING| तमिलनाडु में जारी रहेगी गो-हत्या: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें बकरीद या किसी भी अन्य दिन तमिलनाडु राज्य में कहीं भी गाय या बछड़े की हत्या पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने तमिलनाडु राज्य द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। राज्य ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें राज्य में गायों और बछड़ों की हत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई।

    बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का आखिरी पैराग्राफ (जिसमें राज्य-व्यापी रोक लगाई गई) प्रथम दृष्टया "सुधार" की मांग करता है।

    राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए।

    राज्य ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट का आदेश 'तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958' के विपरीत है। यह अधिनियम सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर 10 वर्ष से अधिक उम्र की उन गायों की हत्या की अनुमति देता है, जो काम और प्रजनन के लिए अनुपयुक्त हैं। उक्त कानून के अलावा, अन्य लागू कानून जैसे 'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960', 'पशु क्रूरता निवारण (बूचड़खाना) नियम, 2001', 'तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम, 1998' और 'तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय नियम, 2023' उन शर्तों को नियंत्रित करते हैं जिनके तहत जानवरों की हत्या की जा सकती है, लेकिन वे पूरी तरह से रोक नहीं लगाते हैं। राज्य के अनुसार, पूरी तरह से रोक का निर्देश देकर हाई कोर्ट ने वैधानिक कानून की जगह न्यायिक कानून लागू कर दिया।

    जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की हाईकोर्ट बेंच ने 27 मई को बकरीद से ठीक पहले 'हिंदू मक्कल काची' के महासचिव के. सूर्या प्रशांत द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर यह आदेश पारित किया। हालांकि याचिकाकर्ता की मांग यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की कि हत्या केवल निर्धारित स्थानों पर हो, लेकिन हाईकोर्ट ने किसी भी दिन कहीं भी गायों और बछड़ों की हत्या पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश पारित किया।

    आदेश पारित करते समय हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश का सहारा लिया, जिसमें कहा गया था कि दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए गो-हत्या पर रोक आवश्यक थी। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी ज़िक्र किया, जिनमें कहा गया कि बकरीद मनाने के लिए गाय की कुर्बानी ज़रूरी नहीं है।

    हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने तर्क दिया कि जब कानून कुछ खास तरह की गायों को तय जगहों पर काटने की इजाज़त देता है तो कानूनी प्रावधान के उलट कोई न्यायिक निर्देश नहीं दिया जा सकता।

    राज्य सरकार ने इस बात पर आपत्ति जताई कि हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश नंबर 1715 पर भरोसा किया, जबकि अदालत के सामने उसकी वैधता या लागू होने का सवाल कभी उठा ही नहीं था। सरकार का तर्क है कि यह कार्यकारी आदेश तमिलनाडु में जानवरों की कुर्बानी से जुड़े कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।

    अपनी स्पेशल लीव पिटिशन में राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट के सामने दायर रिट पिटिशन का दायरा सीमित था - कोयंबटूर में बकरीद के दौरान सार्वजनिक जगहों पर गायों की कुर्बानी रोकने तक। लेकिन डिवीज़न बेंच ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए गाय की कुर्बानी पर "पूरी तरह और हर हाल में रोक" लगाई, जिसमें तय स्लॉटरहाउस भी शामिल थे, जबकि याचिकाकर्ता ने ऐसी कोई राहत नहीं मांगी थी। इस तरह ऐसी राहत दी गई, जिसके लिए न तो कोई दलील दी गई थी और न ही कोई मांग की गई।

    राज्य सरकार ने कहा कि हालांकि हाईकोर्ट ने अपने फैसले के एक हिस्से में सही कहा कि जानवरों की कुर्बानी सिर्फ़ तय स्लॉटरहाउस में ही हो सकती है, लेकिन साथ ही उसने यह भी निर्देश दिया कि बकरीद या किसी भी दिन किसी गाय या बछड़े की कुर्बानी नहीं दी जानी चाहिए। सरकार के मुताबिक, इससे फैसला आपस में ही विरोधाभासी हो जाता है।

    याचिका में हाई कोर्ट की इस बात पर भी सवाल उठाया गया कि अधिकारियों ने असल में यह मान लिया था कि सार्वजनिक जगहों पर गायों की कुर्बानी दी जा रही थी या दी जाएगी। सरकार के मुताबिक, पुलिस ने अपने जवाबी हलफनामे में लगातार यह कहा था कि सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी न हो, यह पक्का करने के लिए पहले ही एहतियाती कदम उठाए जा चुके थे और कोई भी धार्मिक कुर्बानी बंद, गैर-सार्वजनिक जगहों तक ही सीमित रहेगी। सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट का निष्कर्ष राज्य सरकार के पक्ष के उलट है।

    यह याचिका राज्य सरकार की स्टैंडिंग काउंसिल और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जयश्री नरसिम्हन ने दायर की।

    Case : The Secretary to the Government v. K Surya alias K Surya Prasanth | Diary No.36054/2026

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