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एनडीपीएस एक्ट- अगर तलाशी और जब्ती में गड़बड़ी हुई है तो जांच के स्तर पर जमानत देने के लिए इस पहलू पर विचार किया जा सकता है: केरल हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
2 Aug 2021 7:28 AM GMT
एनडीपीएस एक्ट- अगर तलाशी और जब्ती में गड़बड़ी हुई है तो जांच के स्तर पर जमानत देने के लिए इस पहलू पर विचार किया जा सकता है: केरल हाईकोर्ट
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एनडीपीएस एक्ट- अगर तलाशी और जब्ती में गड़बड़ी हुई है तो जांच के स्तर पर जमानत देने के लिए इस पहलू पर विचार किया जा सकता है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर तलाशी और जब्ती में गड़बड़ी हुई है और हानि हुई है, कि यह अभियोजन पक्ष के मामले की जड़ों को कमजोर करता है, तो इस प्रकार के पहलू पर जांच के स्तर पर जमानत के लिए विचार किया जा सकता है।

जस्टिस के हरिपाल की खंडपीठ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट की धारा 22 (c) और 29 के तहत दर्ज प्राथमिकी के संबंध में दो जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

तथ्य

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 17 अप्रैल, 2021 को, नियमित गश्ती कर रहे पुलिस अधिकारियों ने एक मोटरसाइकिल के पास खड़े दो व्यक्तियों, जो कि मामले में याचिकाकर्ता हैं, को रोककर उनके नाम और पते पूछे थे। उसके बाद सब इंस्पेक्टर ने यह पता लगाने ‌लिए उनके पास कोई हथियार है या नहीं, उनकी तलाशी ली थी।

जब कुछ पता नहीं चला तो पुलिस ने उनके नाम और पते नोट किए, और फिर, यह पुष्टि करने के लिए कि उन्होंने जो पहचान बताई है, वह सही है या नहीं, सब इंस्पेक्टर ने उन्हें अपना पर्स खोलने को कहा था। जब उन्होंने पर्स खोलकर दिखाया था तो पहले आरोपी की पर्स में एलएसडी स्टैम्प मिला था और दूसरे आरोपी के पर्स में स्मोकिंग पेपर्स मिले थे।

पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया ‌था और एनडीपीएस एक्ट की धारा 22 (c) और 29 के तहत अपराध दर्ज किया था। आरोप‌ियों के पास से 0.110 ग्राम एलएसडी को जब्त किया गया था।

उल्लेखनीय है कि 6 जुलाई, 2021 तक पुलिस मानती रही कि प्रतिबंधित पदार्थ की मात्रा 0.110 मिलीग्राम है, लेकिन बाद में पता चला कि यह सब इंस्पेक्टर और अन्य पुलिस दलों की एक गलती थी। प्रतिबंधित पदार्थ की मात्रा मात्रा 0.110 ग्राम थी।

कोर्ट की टिप्पणियां

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आग्रह किया कि प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं का पालन किए बिना अपराध दर्ज किया गया था और भले ही सब इंस्पेक्टर द्वारा दोनों याचिकाकर्ताओं की तलाशी ली गई थी, लेकिन एक्ट की धारा 50 के तहत अनिवार्य निर्देशों का पालन करने का कोई प्रयास नहीं किया गया था।

अदालत ने महाजर का अवलोकन किया और कहा कि वकील द्वारा किया गया निवेदन सही था कि एक्ट की धारा 50 के तहत अनिवार्य निर्देशों का पालन करने का कोई प्रयास नहीं किया गया था।

कोर्ट ने कहा, " यह सच है कि अपराध का पता लगाना सब इंस्पेक्टर द्वारा की गई तलाशी का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं था। जैसा कि पहले देखा गया था, उसने याचिकाकर्ताओं की तुरंत तलाशी ली थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे उनके साथ कोई हथियार है या नहीं। उस समय, थोड़ा सा भी संदेह नहीं था कि उन्होंने मादक दवाओं या अन्य पदार्थों जैसी कोई आपत्तिजनक वस्तु रखी थी। उन्होंने आसानी से अपना नाम और पता बताया था और केवल तभी जब सब इंस्पेक्टर पता लगाना चाहा या उन पतों को काउंटर चेक करना चाहा, उन्हें अपना पर्स खोलने के लिए कहा गया था।"

इसके अलावा, यह देखते हुए कि एक्ट की धारा 50 का पालन करने का कोई प्रयास नहीं किया गया था, न्यायालय ने कहा," तलाशी करने से पहले याचिकाकर्ताओं को राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तलाशी लेने के अधिकार से उन्हें अवगत कराया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया ।"

इस प्रकार, जमानत आवेदकों को क्षेत्राधिकार न्यायालय की संतुष्टि के लिए समान राशि के लिए दो सॉल्वेंट स्योरिटीज़ के साथ एक लाख रुपये के बांड निष्पादित करने की शर्त पर जमानत दी गई।

एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 क्या कहती है

यह ध्यान दिया जा सकता है कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 (1) में कहा गया है कि जब धारा 42 के तहत विधिवत अधिकृत कोई अधिकारी धारा 41, धारा 42 या धारा 43 के प्रावधानों के तहत किसी व्यक्ति की तलाशी लेने वाला है , तो वह, यदि ऐसा व्यक्ति ऐसा आवश्यकता समझता है, तो उसे बिना किसी अनावश्यक विलम्ब के धारा 42 में वर्णित किसी भी विभाग के निकटतम राजपत्रित अधिकारी या निकटतम मजिस्ट्रेट के पास ले जाए।

धारा 50 एनडीपीएस एक्ट बताता है कि जांच अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह आरोपी को उसके कानूनी अधिकार से अवगत कराए कि मादक पदार्थों के कब्जे के लिए उसकी तलाशी मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति में की जाए , हालांकि, यदि आरोपी इस कानूनी अधिकार या सहमति से छूट देता है (चाहे वह मौखिक या लिखित हो) तो ऐसे मामले में जांच अधिकारी उसकी तलाशी ले सकता है।

केस टाइटिल - सारथा बनाम केरल राज्य

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